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बस्तर से हुंकार भरेंगे राहुल गांधी: जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में बड़े आंदोलन की तैयारी में कांग्रेस

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रायपुर 31अगस्त Rahul Gandhi Bastar Visit : छत्तीसगढ़ में जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों की सुरक्षा के मुद्दे पर सियासत गर्माने लगी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने पुष्टि की है कि कांग्रेस पार्टी राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रही है। इस बड़े अभियान की शुरुआत बस्तर से होगी, जिसमें शामिल होने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी जल्द ही बस्तर का दौरा कर सकते हैं।

प्रदेश की संपदा बेचने का आरोप

दीपक बैज ने राज्य की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की अमूल्य जल, जंगल, जमीन और प्रचुर खनिज संपदा को उद्योगपतियों के हाथों बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक स्थानीय लोग और आदिवासी अपनी जमीन व संसाधनों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी जनता की इस आवाज को दबने नहीं देगी और उनके अधिकारों की लड़ाई अग्रिम पंक्ति में रहकर लड़ेगी।

बस्तर से पूरे प्रदेश में फैलेगा आंदोलन

दीपक बैज के अनुसार, प्रदेश के जल-जंगल-जमीन और खनिज संसाधनों की रक्षा के लिए पूरी कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी गंभीर रूप से चिंतित हैं। पार्टी ने निर्णय लिया है कि बस्तर से एक वृहद आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसे बाद में सरगुजा सहित प्रदेश के अन्य सभी संभागों और जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।

राहुल गांधी के इस प्रस्तावित दौरे को इसी जन-आंदोलन को धार देने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, राहुल गांधी के बस्तर आगमन की सटीक तारीख और उनके विस्तृत कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है, लेकिन पार्टी ने इसकी तैयारियां और रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

 बता दे कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2028 में भले ही अभी समय बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य की राजनीति में बेहद निर्णायक माने जाने वाले बस्तर संभाग पर कांग्रेस का विशेष ध्यान है। पार्टी बस्तर में अपने कैडर को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने और आदिवासी समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

जल-जंगल-जमीन और वनाधिकार बनेंगे मुख्य हथियार

बस्तर में लंबे समय तक नक्सलवाद और सुरक्षा ही मुख्य राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और दूरस्थ इलाकों में प्रशासनिक पहुंच बढ़ने के बाद अब राजनीतिक विमर्श का केंद्र बदल रहा है। कांग्रेस इस बदलते माहौल में आदिवासी अधिकारों और विकास के सवालों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है।

पार्टी आगामी दिनों में जल-जंगल-जमीन, खदान आवंटन, वनाधिकार पट्टे, विस्थापन-पुनर्वास, स्थानीय रोजगार और लघु वनोपज जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है। इसके अलावा समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को भी आदिवासी हितों और स्वायत्तता के नजरिए से बहस का हिस्सा बनाया जा सकता है, ताकि केंद्र और राज्य सरकार को घेरा जा सके।

केवल रैली नहीं, सीधा संवाद: राहुल गांधी का संभावित दौरा

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के संभावित बस्तर दौरे को केवल एक पारंपरिक राजनीतिक जनसभा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। पार्टी इसे एक गहन संवाद कार्यक्रम का रूप देने में जुटी है, जहां राहुल गांधी आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, स्थानीय सामाजिक संगठनों और प्रभावित परिवारों से सीधे बात करेंगे।

इसके लिए संगठनात्मक स्तर पर एक विशेष टीम या समिति गठित कर बस्तर के अलग-अलग क्षेत्रों से जमीनी रिपोर्ट और फीडबैक जुटाया जा रहा है। इस रिपोर्ट में जमीन विवाद, वनाधिकार, बुनियादी सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य) और रोजगार से जुड़ी स्थिति का ब्यौरा होगा, जिसे दौरे के दौरान राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा।

यदि कांग्रेस इन स्थानीय अपेक्षाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बीच सही संतुलन बनाते हुए एक प्रभावी अभियान चला पाती है, तो आने वाले समय में बस्तर की राजनीति का रुख बदल सकता है।

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