नई दिल्ली 31 अगस्त Indian Auto Industry: भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए ओणम से लेकर दिवाली तक का त्योहारी सीजन बिक्री के लिहाज से साल का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान लोग बोनस मिलने और नए वाहन की खरीदारी को शुभ मानने के कारण जमकर पैसे खर्च करते हैं। कारों की भारी मांग को देखते हुए वाहन निर्माताओं ने उत्पादन बढ़ा दिया है और डीलरों के पास गाड़ियों का स्टॉक फुल कर दिया है। जुलाई 2026 में डीलरों को वाहनों की रिकॉर्ड डिलीवरी की गई, जिससे बाजार में काफी सकारात्मक माहौल बना। लेकिन इस उत्साह के बीच एक बड़ी चुनौती भी सामने खड़ी है—त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही कारों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है।

कीमतों में यह वृद्धि किसी मनमाने फैसले का नतीजा नहीं है, बल्कि आर्थिक दबावों का परिणाम है। मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसे प्रमुख वाहन निर्माताओं ने इनपुट लागत (जैसे स्टील, एल्युमीनियम और इलेक्ट्रॉनिक घटकों के दाम) बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ाई हैं। इसके अलावा, महंगाई और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी की वजह से आयातित पार्ट्स महंगे हो गए हैं। ऑटो कंपनियां अब तक इस लागत को खुद झेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने इसका बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर दिया है।
इसके बावजूद, कंपनियां त्योहारों के दौरान आक्रामक रणनीति अपना रही हैं। वे नए मॉडलों, विशेष रूप से एसयूवी (SUV) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लॉन्चिंग के दम पर ग्राहकों को लुभाने की उम्मीद कर रही हैं। मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों ने एंट्री-लेवल कारों पर कम और प्रीमियम मॉडलों पर अधिक मूल्य वृद्धि की है ताकि आम ग्राहक ज्यादा प्रभावित न हों। अब गेंद ग्राहकों के पाले में है—उन्हें यह तय करना है कि वे बढ़ी हुई कीमत पर कार खरीदें, बेहतर डील के इंतजार में फैसला टाल दें, या अपने बजट के अनुसार कम कीमत वाला मॉडल चुनें।








