Cobra verification : छत्तीसगढ़ के कोरबा से एक बेहद ‘ज्ञानवर्धक’ खबर सामने आई है, जिसने मेडिकल साइंस के पुराने नियमों को धता बता दिया है। घटना दादर क्षेत्र की है, जहाँ सफाई कर रहे रामदयाल जी को एक कोबरा ने डस लिया। कोबरा बेचारा काटने का ‘कर्तव्य’ निभाकर वापस अपने बिल में सो गया। लेकिन असली ड्रामा तो अस्पताल पहुँचने के बाद शुरू हुआ।
अस्पताल के ज्ञानी डॉक्टरों ने परिजनों से कहा— “अरे भाई, जब तक सांप का बायोमीट्रिक या आधार कार्ड नहीं दिखाओगे, इलाज कैसे शुरू करें? पहचानो कौन सा सांप था!”
अब बेचारे परिजन क्या करते? मरीज को स्ट्रेचर पर छोड़कर स्नेक कैचर की टीम बुलाई गई। टीम मौके पर पहुँची, बिल खोदा गया, और आधे-एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कोबरा जी को ‘ससम्मान’ बिल से बाहर निकाला गया। इसके बाद कोबरा का बाकायदा ‘अस्पताल दौरा’ कराया गया ताकि डॉक्टर साहब उसकी शक्ल देखकर आश्वस्त हो सकें कि हाँ, यह वही ‘रॉयल नाग’ है!
पहचान पत्र जमा होने के बाद रामदयाल जी का इलाज शुरू हुआ और गनीमत रही कि उनकी जान बच गई। बाद में नाग देवता को जंगल में छोड़ दिया गया, शायद वे भी सोच रहे होंगे कि ‘काटा तो एक बार था, पर अस्पताल के चक्कर दो बार लगवा दिए!’
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