रायपुर 24 अगस्त Muktakashi Manch: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर वर्षा ऋतु के सौंदर्य, राग और नृत्य का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। सावन की झड़ी और घुमड़ते बादलों के बीच आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘पावस प्रसंग’ में भारतीय शास्त्रीय नृत्य और गायन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुक्ताकाशी यानी खुले आकाश के नीचे प्रकृति के इस सुहावने वातावरण में कथक की ताल और शास्त्रीय संगीत की तान ने पावस (वर्षा ऋतु) की अनुभूतियों को पूरी तरह जीवंत कर दिया।

सावन के उल्लास को दर्शाती प्रमुख प्रस्तुतियां
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शाश्वती बैनर्जी (कथक नृत्य): अपनी भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं से वर्षा की रिमझिम, बादलों की गड़गड़ाहट और सावन की उमंग को मंच पर उतारा।
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मेघा बोस (शास्त्रीय गायन): सुमधुर स्वरों के माध्यम से पावस ऋतु की कोमल और संवेदनशील अनुभूतियों को पेश कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
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इशिका गिरी (कथक नृत्य): शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों और उल्लास के साथ वर्षा ऋतु के सौंदर्य का प्रभावी मंचन किया।
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प्रदीप कुमार चौबे (शास्त्रीय गायन): मेवाती घराने के इस वरिष्ठ कलाकार ने अपनी गायकी से पूरे वातावरण को भक्ति और संगीत के सुरों से सराबोर कर दिया।
कलाकारों का सम्मान और विचार
कार्यक्रम के दौरान साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने भाग लेने वाले सभी कलाकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय कला परंपरा हमारी समृद्ध विरासत का अभिन्न अंग है और ऐसे मंच नई पीढ़ी में संस्कृति के प्रति रुचि जगाते हैं।
कार्यक्रम के संचालक डॉ. संजय कनौजे ने भी कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि कला और संस्कृति समाज में संवेदनशीलता और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का काम करती हैं। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के उप संचालक श्री उमेश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार श्री दीपेंद्र दीवान, श्री उदयभान सिंह सहित शहर के अनेक कलाप्रेमी उपस्थित रहे।








