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राजनीतिक घमासान: ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन पर बीजेपी का रुख सख्त, कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप

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नई दिल्ली Political Controversy :

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। नई दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् को लेकर अपनाए गए रुख की तीखी आलोचना की गई। बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों के पूर्ण गायन के साथ हुई, जिसके बाद पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ 10 बिंदुओं का कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित किया।

बीजेपी का आक्रामक रुख और जनसंपर्क अभियान

बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व—जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं—ने कांग्रेस के कदम को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और राष्ट्रीय स्वाभिमान का सीधा अपमान बताया। पार्टी ने साफ किया है कि राजनीतिक फायदे या वोट बैंक के तुष्टीकरण के लिए राष्ट्रगीत की विरासत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बीजेपी ने इस मुद्दे पर देश भर में राजनीतिक प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान चलाने का एलान किया है। इसके साथ ही, महात्मा गांधी के उस कथन को भी प्रचारित किया जाएगा, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को साम्राज्यवाद-विरोधी और शुद्धतम राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत उद्घोष बताया था।

कांग्रेस का पक्ष: 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव का हवाला

दूसरी ओर, कांग्रेस कार्य समिति (CWC) का कहना है कि वह केवल 1937 की ऐतिहासिक परंपरा का पालन कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि अक्टूबर 1937 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे नेताओं की सहमति से पार्टी कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो पद गाने का फैसला लिया गया था। कांग्रेस का कहना है कि वह राष्ट्रनिर्माताओं द्वारा तय की गई उसी परंपरा का सम्मान कर रही है।

कानूनी संरक्षण और 3 साल की सजा का प्रावधान

राजनीतिक गतिरोध के बीच राष्ट्रगीत को वैधानिक सुरक्षा भी प्राप्त हो चुकी है:

  • संसदीय मंजूरी: राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून संसद के दोनों सदनों (29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा) से पारित हुआ।

  • कानूनी दर्जा: अगस्त के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ ही इसे आधिकारिक कानून का रूप मिल गया।

  • सख्त प्रावधान: अब ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालता है या सार्वजनिक रूप से इसका अनादर करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल हो सकती है।

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