बीरभूम/कोलकाता, 16 अगस्त। पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बेहद स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर डॉ. आशीष बनर्जी का शव रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित उनके आवास से सटे पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका हुआ पाया गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल भेज दिया। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन कर रही है।
घटनास्थल से सुसाइड नोट बरामद
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है। हालांकि, जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फिलहाल इस बात का खुलासा नहीं किया है कि सुसाइड नोट में क्या लिखा है।
फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि मौत की सही वजहों और परिस्थितियों का स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सके।
रामपुरहाट से 5 बार विधायक रहे थे आशीष बनर्जी
आशीष बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति और बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस का एक बेहद बड़ा और भरोसेमंद चेहरा माने जाते थे। उनका राजनीतिक करियर काफी समृद्ध रहा:
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लगातार 5 बार जीत: उन्होंने रामपुरहाट विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व लगातार 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 के चुनावों में किया।
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मंत्रिमंडल में भूमिका: राज्य की ममता बनर्जी सरकार में उन्होंने कृषि, उच्च शिक्षा और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री के रूप में सेवाएं दीं।
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डिप्टी स्पीकर का पद: वे पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के पद पर भी आसीन रहे।
हालिया राजनीतिक हलचल और हार का झटका
वर्ष 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आशीष बनर्जी को रामपुरहाट सीट से अपने राजनीतिक करियर में पहली बार हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद से ही वे राजनीतिक रूप से असहज और तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे थे।
चुनावी नतीजे आने के बाद, जून 2026 में उन्होंने बीरभूम जिले में टीएमसी की कोर कमेटी और जिला समिति के अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद से ही वे सक्रिय राजनीति से थोड़ा दूरी बनाए हुए थे। उनके इस तरह अचानक चले जाने से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पूरे बीरभूम जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।








