रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और विकासपरक पहलों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है. राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के राज्य स्तरीय बुनकर सम्मेलन के दौरान एक ऐतिहासिक और भावुक दृश्य देखने को मिला.

सुकमा जिले की 9 आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने पारंपरिक हथकरघा वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया. जिन हाथों में कभी हिंसा का प्रतीक हथियार हुआ करते थे, उन्होंने आज छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कोसा सिल्क और हथकरघा परिधानों को आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शित किया. यह आयोजन बदलते बस्तर और शासन की पुनर्वास योजनाओं की सफलता का एक सशक्त उदाहरण बना.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बढ़ाया हौसला
इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यधारा में लौटीं इन महिलाओं के साहस की सराहना की और उनसे आत्मीय संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाया. पहली बार राजधानी रायपुर पहुंचीं इन महिलाओं के लिए यह पल बेहद यादगार रहा.
कौशल विकास और 7 दिनों की विशेष ट्रेनिंग
प्रदेश सरकार के स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के तहत इन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मुंबई से आए पेशेवर विशेषज्ञों ने उन्हें 7 दिनों की विशेष ट्रेनिंग दी, जिसमें निम्नलिखित बातें शामिल थीं:
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रैंप वॉक और ग्रूमिंग: मंच पर चलने और परिधानों को करीने से प्रस्तुत करने का अभ्यास.
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कम्युनिकेशन स्किल्स: मंच पर बिना किसी संकोच के अपनी बात रखने का प्रशिक्षण.
जंगलों के खौफ से निकलकर फैशन और विकास की मुख्यधारा तक पहुंची इन महिलाओं की यह कहानी महज एक रैंप वॉक नहीं, बल्कि भटके हुए लोगों को सम्मानजनक जिंदगी देने की एक मानवीय मिसाल है.








