राजस्थान 10 अगस्त: राजस्थान के बालोतरा जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और फिल्मी कहानी जैसा मामला सामने आया है। चोरी के डर से एक किसान ने अपने 5 लाख रुपये खेत में गाड़ दिए, लेकिन वह खुद ही उस जगह को भूल गया। महीनों तक जमीन के नीचे दबे रहने के बाद जब आखिरकार वह रकम बाहर आई, तो नोटों की हालत देख किसान के होश उड़ गए।

प्लॉट बेचकर मिले थे 5 लाख रुपये
पचपदरा क्षेत्र के रहने वाले किसान मांगीलाल मेघवाल ने करीब एक साल पहले अपना एक प्लॉट बेचा था, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये मिले थे। उनका इरादा खेत में एक कमरा बनवाने का था, लेकिन घर में चोरी होने के डर और बेटों द्वारा पैसे खर्च कर दिए जाने की चिंता में उन्होंने इन रुपयों को एक अनोखे और खतरनाक तरीके से सुरक्षित करने का फैसला किया।

मांगीलाल ने एक रात पूरी रकम को पॉलीथीन की थैली में भरकर खेत में एक गड्ढा खोदकर छिपा दिया। इस राज़ की भनक उन्होंने अपने परिवार में किसी को भी नहीं लगने दी।
10 बीघा खेत में गाड़कर भूला किसान
वक्त बीतने के बाद जब खेत में कमरा बनाने की नौबत आई, तो मांगीलाल को अपने छुपाए हुए पैसों की याद आई। लेकिन 10 बीघा में फैले खेत में वह उस सटीक जगह को भूल चुके थे जहाँ उन्होंने पैसे दबाए थे।
अकेले काफी तलाशने के बाद जब पैसे नहीं मिले, तो उन्हें मजबूरन अपने परिवार को पूरी सच्चाई बतानी पड़ी। पहले तो परिवार को उनकी बात पर यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन बाद में सबने मिलकर खेत की खाक छानी। इसके बावजूद महीनों तक पैसों का कोई सुराग नहीं मिला।
बारिश ने खोला राज़, दीमक ने बना दिए कागज के टुकड़े
करीब एक साल तक वे 5 लाख रुपये जमीन के अंदर दबे रहे। इसके बाद बारिश के मौसम में खेत की जुताई और बुवाई की तैयारी के दौरान जमीन के भीतर दबी वह थैली किसी तरह बाहर आ गई।
एक दिन जब मांगीलाल की पत्नी और बेटा खेत की तारबंदी ठीक कर रहे थे, तब उनकी नजर उस कटी-फटी थैली पर पड़ी। जैसे ही उन्होंने थैली खोलकर देखी, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 500-500 रुपये के वे नोट, जिन्हें चोरों से बचाने के लिए जमीन में छुपाया गया था, उन्हें दीमक पूरी तरह चट कर चुकी थी और वे सिर्फ कागज के टुकड़ों में तब्दील हो चुके थे।
बैंक से भी मिली निराशा
इस बड़े नुकसान के बाद परिवार ने हिम्मत जुटाकर बचे-कुचे नोटों को बदलने के लिए बैंक का रुख किया। वे पहले स्थानीय SBI शाखा और बाद में बालोतरा स्थित मुख्य शाखा भी पहुंचे, लेकिन नोटों की अत्यंत दयनीय हालत को देखकर बैंकों ने भी उन्हें बदलने से साफ इनकार कर दिया। अब इस गरीब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी मेहनत की इस कमाई का क्या होगा।








