बिलासपुर 26 जुलाई । थाना सिविल लाइन क्षेत्र के गणेश चौक निवासी रजनीश सेठ के घर हुई चोरी के मामले में बिलासपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज कुछ घंटों के भीतर ही मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही 5 करोड़ रुपये की चोरी की अफवाह को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह जानकारी तथ्यहीन और निराधार थी। पुलिस ने इस मामले में 10 से 13 वर्ष की आयु के तीन विधि से संघर्षरत बालकों (नाबालिगों) को अभिरक्षा में लिया है और चोरी गया अधिकांश मशरूका बरामद कर लिया है।

घटना का विवरण
प्रार्थी रजनीश सेठ अपने परिवार के साथ 18 जुलाई 2026 से ऋषिकेश भ्रमण पर गए हुए थे। उनके घर की सुरक्षा के लिए रात में गार्ड तैनात था। 23 जुलाई की रात गार्ड ने घर के पीछे का विंडो एसी निकला हुआ देखकर प्रार्थी को सूचना दी। प्रार्थी के परिजनों ने मौके पर पहुंचकर जांच की, तो शुरुआती तौर पर अनुमान लगाया गया कि अलमारी से लगभग 1.85 लाख से 2.35 लाख रुपये नगद, 15 से 20 तोला सोने के आभूषण और अन्य सामान चोरी हुआ है।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाह
प्रार्थी के शुरुआती अनुमान और वीडियो कॉल के आधार पर बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर लगभग 5 करोड़ रुपये की चोरी होने की झूठी और सनसनीखेज खबर फैला दी, जिससे आम जनता में भ्रम और डर का माहौल बन गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह खबर पूरी तरह असत्य थी।
पुलिस की संयुक्त कार्रवाई और बरामदगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सिविल लाइन और ACCU की संयुक्त टीम ने तुरंत तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 से 13 वर्ष के तीन बालकों को पकड़ा। पूछताछ में उन्होंने चोरी करना कबूल कर लिया।
उनकी निशानदेही पर पुलिस ने निम्नलिखित सामान जप्त किया:
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नगद: ₹1,06,635/- और ₹4,500/- के पुराने नोट
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आभूषण: सोने-चांदी के जेवर
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कीमती वस्तुएं: कुछ बहुमूल्य रत्न (प्रथम दृष्टया नीलम)
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अन्य सामग्री: पीतल-कांसे के बर्तन, नल की टोटियां, सिटकनी, कब्जे और अन्य धातु फिटिंग का सामान।
प्रार्थी द्वारा जप्त किए गए सामान की पहचान कर ली गई है। पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
बिलासपुर पुलिस की अपील
बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि किसी भी आपराधिक घटना पर अपुष्ट, भ्रामक या अफवाह भरी जानकारियों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करें। ऐसा करने से कानून-व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।








