📍‘20 जुलाई को संसद मार्च सफल नहीं हुआ तो भूत बनकर लौटूँगा’ – अनशन के 20वें दिन सोनम वांगचुक का बड़ा बयान
📍सोनम वांगचुक को भले ही जंतर मंतर से हटा दिया गया है, बावजूद इसके उनकी भूख हड़ताल जारी है। इस बीच उन्होंने अस्पताल से ही संदेश भेजा है।
📍डॉक्टरों ने जताई सोनम की बिगड़ती सेहत पर चिंता, मामला हाई कोर्ट पहुँचा
नई दिल्ली 19 जुलाई : शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने अब एक बेहद गंभीर और निर्णायक मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को अपने अनशन के 20वें दिन वांगचुक ने एक ऐसा बयान दिया जिसने वहाँ मौजूद समर्थकों में नया जोश भर दिया, तो वहीं सरकार की चिंताएँ भी बढ़ा दी हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल के बाद एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस ने शनिवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर लगातार उनके सेहत की निगरानी कर रहे हैं। शनिवार सुबह अचानक ही दिल्ली पुलिस की टीम ने उनकी खराब होती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जंतर मंतर से अस्पताल पहुंचाया था। इस दौरान अस्पताल प्रशासन उनकी हेल्थ को लेकर अपडेट भी शेयर कर रहा है। डॉक्टरों का कहना यही है कि सोनम वांगचुक को अपना अनशन तोड़ देना चाहिए। हालांकि, वांगचुक इसके लिए तैयार नहीं हैं।
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हल्के-फुल्के लेकिन बेहद दृढ़ अंदाज में समर्थकों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा:
“मैं किसी तरह 20 जुलाई तक जिंदा रहूँगा, ताकि आप सभी के साथ संसद तक मार्च कर सकूं। लेकिन याद रखिएगा, अगर 20 जुलाई का यह ‘संसद चलो’ मार्च उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊँगा।”
उनके इस बयान पर जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने जोरदार तालियों और गगनभेदी नारों के साथ उनका समर्थन किया।
‘चिंता छोड़ो, 20 जुलाई की तैयारी करो’ – वांगचुक की अपील
लगातार गिरते स्वास्थ्य के बावजूद सोनम वांगचुक का हौसला अडिग है। उन्होंने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि यह समय उनके स्वास्थ्य पर चिंता जताने या अनशन खत्म करने की गुजारिश करने का नहीं है, बल्कि आंदोलन को और अधिक मजबूत करने का है।
उन्होंने कहा, “मैं बाहर से भले ही कमजोर दिख रहा हूँ, लेकिन अंदर से पूरी तरह मजबूत हूँ। बिना किसी ठोस सरकारी जवाब या कार्रवाई के अनशन तोड़ना इस आंदोलन के पवित्र उद्देश्य को कमजोर कर देगा। हमें अपनी असली ताकत 20 जुलाई को दिखानी है, जब हम शांतिपूर्वक लोकतंत्र के मंदिर (संसद) की ओर बढ़ेंगे।”
मेडिकल बुलेटिन: 9 किलो गिरा वजन, हाई कोर्ट सख्त
सोनम वांगचुक का अनशन अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और उनका शरीर धीरे-धीरे साथ छोड़ रहा है। डॉक्टरों द्वारा जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक:
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वजन: घटकर 56.65 किलोग्राम रह गया है (पिछले 24 घंटों में 500 ग्राम और अनशन की शुरुआत से अब तक 9 किलो से ज्यादा वजन कम हुआ है)।
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ब्लड प्रेशर (BP): 105/61 mmHg
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ब्लड शुगर: 80 mg/dL
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ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO2): 97 प्रतिशत
हालाँकि वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क और होश में हैं, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें चौबीसों घंटे कड़ी चिकित्सकीय निगरानी में रखने की सलाह दी है। दूसरी ओर, यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुँच गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना मॉनिटरिंग की जाए और आपातकालीन स्थिति के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जाए।
व्यंग्य से जनआंदोलन तक: CJP के प्रदर्शन का 29 वां दिन
जंतर-मंतर पर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन अनोखा है। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन यहाँ पिछले 28 दिनों से चल रहा है। शुरुआत में इसे छात्रों का एक प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक (Satirical) विरोध प्रदर्शन माना जा रहा था। लेकिन जैसे ही सोनम वांगचुक इस आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे, इसने एक देशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले लिया।
20 जुलाई: ‘संसद चलो’ मार्च पर टिकीं नजरें
आंदोलनकारियों का अगला और सबसे बड़ा पड़ाव 20 जुलाई को होने वाला ‘संसद चलो’ मार्च है। गौर करने वाली बात यह है कि इसी दिन से संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है। ऐसे में सत्र के पहले ही दिन प्रदर्शनकारियों का संसद की तरफ कूच करना सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकता है। अब देखना यह होगा कि 20 जुलाई को लेकर प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या सरकार वांगचुक की माँगों पर कोई कदम उठाती है।
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