पुरी (ओडिशा): ओडिशा के पवित्र तटीय शहर पुरी में भारी बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के बीच नौ दिवसीय वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा का 16 जुलाई को भव्य शुभारंभ हुआ।

हालांकि, इस भारी भीड़ और उमस के बीच कुछ दुखद हादसे भी सामने आए हैं, जिसमें दो श्रद्धालुओं की जान चली गई है।
Advt

भीड़ और दिल का दौरा पड़ने से 2 की मौत, कई बीमार
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से एक श्रद्धालु की मौत हो गई और कई लोग अस्वस्थ हो गए। वहीं, एक अन्य अलग घटना में एक और व्यक्ति की कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) की वजह से मौत हो गई। सोशल मीडिया पर सामने आए दृश्यों में प्रशासन के कर्मचारी बेहोश श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाते दिखे हैं।
प्रशासन का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: 100 से अधिक लोगों को बचाया
फायर और इमरजेंसी सर्विस के IGP डॉ. उमाशंकर दास ने बताया कि भीड़ में दबने और दम घुटने के कारण बेचैन हो रहे करीब 100 लोगों को सुरक्षाबलों ने सुरक्षित रेस्क्यू किया है।
“हमने प्रभावित लोगों को तुरंत अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस तक पहुँचाया है। पुरी के मौसम को देखते हुए हमारी टीम उमस और बारिश दोनों स्थितियों के लिए तैयार थी। निचले इलाकों से पानी निकालने के लिए पहली बार 25 स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (एडवांस्ड उपकरणों से लैस) तैनात की गई हैं। पिछले दो दिनों में 60 से अधिक जगहों से 3-4 लाख लीटर से ज्यादा पानी निकाला जा चुका है।” — डॉ. उमाशंकर दास, IGP (फायर एंड इमरजेंसी सर्विस)
निर्धारित समय से पहले शुरू हुईं रस्में, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा पुरी
विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत तय समय से पहले भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के ‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के साथ हुई।
-
रथों पर सवार हुए भगवान: 12वीं शताब्दी के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर से देवी-देवताओं को भव्य जुलूस के साथ उनके सुसज्जित रथों तक लाया गया। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों (घंटा, कहली और तेलिंगी बाजा) की दिव्य ध्वनि गूंजती रही।
-
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पुजारियों के पवित्र वैदिक मंत्रोच्चार और ओडिसी कलाकारों के मनमोहक नृत्य के साथ भगवान का स्वागत किया गया।
-
समय में देरी: हालांकि ‘पहंडी बीजे’ की रस्में समय से पहले शुरू हो गई थीं, लेकिन अत्यधिक भीड़ और व्यवस्थाओं के चलते इनके समापन में दो घंटे से अधिक की देरी हुई। अब भगवान अपने जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों तक प्रवास करेंगे।








