रायपुर, 16 जुलाई 2026: राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर में आज रथयात्रा का महापर्व अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशेष रूप से शामिल होकर महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
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सोने की झाड़ू से निभाई ‘छेरा-पहरा’ की रस्म

रथयात्रा के शुभारंभ से पहले राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सोने की झाड़ू से ‘छेरा-पहरा’ की रस्म निभाई। इसके तहत उन्होंने रथमार्ग की प्रतीकात्मक सफाई की, जिसके बाद महाप्रभु की प्रतिमाओं को आदरपूर्वक रथ पर विराजित किया गया।
छेरा-पहरा का संदेश: यह रस्म इस बात का प्रतीक है कि भगवान के दरबार में सभी इंसान एक समान हैं और सेवा ही संसार का सर्वोच्च धर्म है।
किसानों की खुशहाली और अच्छी बारिश की प्रार्थना
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रथयात्रा को सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व बताते हुए प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा:
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अन्नदाता के रक्षक: भगवान जगन्नाथ किसानों के आराध्य और अन्नदाता के रक्षक हैं। उन्हीं की अनुकंपा से खेतों में हरियाली आती है और किसानों के घर समृद्ध होते हैं।
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विकास की कामना: मुख्यमंत्री ने महाप्रभु से प्रार्थना की कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में भरपूर बारिश हो, किसानों की मेहनत सफल हो और प्रदेश निरंतर उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़े।
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सद्भाव और एकता: ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारे और सामूहिक चेतना का संचार करते हैं।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा का अनूठा सांस्कृतिक सेतु
ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ के प्रति गहरी जन-आस्था है। गायत्री नगर में होने वाला यह आयोजन हर साल पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तर्ज पर ही पूरी भव्यता से आयोजित किया जाता है। यह पर्व उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) की समृद्ध परंपराओं को आपस में जोड़ने का एक बेहद मजबूत और पवित्र माध्यम है।
इस भव्य उत्सव के दौरान सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक-धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के उद्घोष, शंखध्वनि और भजनों से गुंजायमान रहा।








