नारायणपुर के दुर्गम वनांचलों से निकलकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के गलियारों तक पहुँचा पारंपरिक स्वाद; वन मंत्री केदार कश्यप और जिला प्रशासन की पहल से महिला स्व-सहायता समूहों को मिला बड़ा मंच।
Abujhmad To Vidhan Sabha| 14 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और वनांचलों के पारंपरिक स्वादों ने आज देश के सबसे अनूठे विधायी परिसरों में से एक, छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपनी धाक जमाई।
नारायणपुर जिले के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे अबूझमाड़ की सदियों पुरानी पाक कला और कृषि विरासत आज विधानसभा की चौखट तक पहुँची।
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विधानसभा परिसर में आयोजित एक विशेष खाद्य प्रदर्शनी में जब जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और विधायकों के सामने अबूझमाड़ के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन परोसे गए, तो पूरा परिसर इसकी भीनी-भीनी खुशबू से सराबोर हो उठा। यह आयोजन महज एक खान-पान की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्थानीय कृषि और जनजातीय संस्कृति के गौरव का एक ऐतिहासिक संगम साबित हुआ।
‘अरक चावल’ की खीर बनी आकर्षण का केंद्र
इस विशेष आयोजन में सबसे बड़ा आकर्षण रहा अबूझमाड़ का पारंपरिक ‘अरक (अथवा अरवा) चावल’।
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क्या है अरक चावल?
यह बिना उबाले (कच्चे) धान से बेहद सावधानी के साथ तैयार किया जाने वाला चावल है। अपने प्राकृतिक हल्के पीले रंग, खिले हुए दानों और बेहतरीन पोषक तत्वों के लिए पहचाने जाने वाले इस चावल की अपनी एक विशिष्ट प्राकृतिक सुगंध होती है। पारंपरिक और जैविक तरीकों से उगाए जाने के कारण पकने के दौरान यह पूरी रसोई को महका देता है।
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चखते ही मुरीद हुए माननीय:
इस खास चावल से तैयार की गई स्वादिष्ट और मखमली खीर का स्वाद जैसे ही माननीयों की जुबान पर चढ़ा, हर कोई तारीफ किए बिना नहीं रह सका। मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की एक ‘अनमोल और दुर्लभ खाद्य धरोहर’ करार दिया।
प्रशासनिक मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों से मिली उड़ान
अबूझमाड़ के इस दुर्लभ पारंपरिक स्वाद को धुर नक्सल प्रभावित और सुदूर अंचलों से निकालकर राज्य के शीर्ष सदन (विधानसभा) तक पहुँचाने का सफर आसान नहीं था।
इस पूरी सोच को धरातल पर उतारने में छत्तीसगढ़ के वन मंत्री श्री केदार कश्यप और नारायणपुर कलेक्टर की दूरदर्शी सोच और कुशल मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके प्रयासों से ही नारायणपुर के इस छिपे हुए खजाने को इतना बड़ा और सम्मानजनक मंच मिल सका, जिसने स्थानीय उत्पादों को सीधे नीति-निर्माताओं के बीच पहुँचा दिया।
दीदियों के हुनर की गूंज: महिला आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
यह आयोजन अबूझमाड़ की स्व-सहायता समूह (SHG) की दीदियों के हुनर और उनके कठिन परिश्रम की जीत है।
“अबूझमाड़ की पाक परंपरा केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। विधानसभा में मिला यह सम्मान हमारे पारंपरिक कृषि उत्पादों और स्थानीय महिलाओं की आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देगा।”
वनांचल की इन जांबाज दीदियों ने साबित कर दिखाया कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो सदियों पुराने पारंपरिक ज्ञान को न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान दिलाई जा सकती है। यह पहल वनांचल की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।









