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“चुनाव हारना राहुल गांधी का काम, मेरा नहीं… मैं तो सीधे PM मोदी से हारा हूं” — अवध ओझा का बेबाक दावा

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 Political Drama : चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने वाले देश के मशहूर कोचिंग शिक्षक और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अवध ओझा एक बार फिर अपने चिर-परिचित तीखे और बेबाक अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा सीट से मिली हालिया शिकस्त पर बात करते हुए ओझा ने एक लोकप्रिय पॉडकास्ट में कई चौंकाने वाले दावे किए और अपनी हार का ठीकरा सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोड़ दिया।

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“हारना राहुल गांधी का काम, मैं तो रेस का धावक हूं”

अपनी हार को स्वीकार करने के तरीके पर भी अवध ओझा ने तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:

“मैं चुनाव हारा नहीं हूं, बल्कि मैं इस रेस का एक बहुत मजबूत धावक हूं। चुनाव हारने का काम राहुल गांधी का है, मेरा नहीं।”

उन्होंने शुरुआती चुनौतियों का जिक्र करते हुए माना कि जब वे पहले दिन प्रचार के लिए उतरे, तो पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और पदाधिकारी उनसे नाराज थे। कार्यकर्ताओं का दर्द था कि 15 साल से जमीन पर पसीना वे बहा रहे हैं और टिकट किसी बाहरी को थमा दिया गया। ओझा ने कहा कि कार्यकर्ताओं का गुस्सा जायज था, इसलिए उन्होंने खुद सबके घर जाकर हाथ जोड़े और उन्हें अपने साथ मिलाया।

जब मोदी ने छुए पैर, तो पलट गई पटपड़गंज की बाजी!

अवध ओझा ने अपनी हार के पीछे एक बेहद दिलचस्प और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वे अपने सामने खड़े विरोधी उम्मीदवार से नहीं, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हारे हैं।

ओझा के मुताबिक, चुनाव के ऐन वक्त पर गेम तब बदला जब:

  • PM मोदी का मास्टरस्ट्रोक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पटपड़गंज आए और उन्होंने ओझा के विरोधी प्रत्याशी के पैर छू लिए।

  • वोटरों का मूड स्विंग: जिस इलाके में पहले से ही 70 फीसदी लोग बीजेपी के समर्थक हों, वहां देश का प्रधानमंत्री अगर किसी के पैर छू ले, तो माहौल का बदलना तय था।

ओझा का तंज: “उस माहौल में मेरे जीतने का सिर्फ एक ही रास्ता बचा था कि खुद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आते और सरेआम मेरे पैर छू लेते।”

जमानत जब्त होने के कयासों को किया खारिज

अवध ओझा ने कहा कि चुनाव लड़ने से पहले उनके तमाम शुभचिंतकों ने उन्हें आगाह किया था कि वे राजनीति में न उतरें, वरना उनकी जमानत तक जब्त हो जाएगी। लेकिन ओझा ने दावा किया कि तमाम कयासों और 1000 वोटों के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए पटपड़गंज की जनता ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा प्यार, सम्मान और वोट दिए हैं।

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