दतिया/भोपाल 11 जुलाई : मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा करते ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और बगावत की स्थिति बन गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेहद करीबी माने जाने वाले और मध्य प्रदेश बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट पार्टी ने काट दिया है। उनके स्थान पर संघ (RSS) पृष्ठभूमि के नेता और पूर्व गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया है।
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टिकट कटने की खबर आते ही दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों और बीजेपी कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।
सामूहिक इस्तीफे और हाईवे जाम
नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में उतरे कार्यकर्ताओं ने दतिया में भारी विरोध प्रदर्शन किया और हाईवे को जाम कर दिया। विरोध की आग यहीं नहीं रुकी, बल्कि सांगठनिक स्तर पर बीजेपी को बड़ा झटका लगा है:
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सामूहिक इस्तीफा: बीजेपी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट रघुवीर सिंह कुशवाहा समेत विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
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बूथ स्तर पर बगावत: दतिया विधानसभा के सभी 291 बूथों के अध्यक्षों और उनकी कार्यकारिणी ने भी सामूहिक रूप से अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं।
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पार्टी को अल्टीमेटम: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेजे गए पत्र में बागी नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर फैसला नहीं बदला गया, तो वे खुला विरोध करेंगे। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव?
यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक फ्रॉड मामले में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद खाली हुई थी। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद विधानसभा सचिवालय ने तत्काल प्रभाव से दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की।
नरोत्तम मिश्रा साल 2023 के मुख्य चुनाव में मिली हार का बदला लेने के लिए पूरी तैयारी कर चुके थे, यहां तक कि उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था। लेकिन पार्टी के अचानक आए फैसले ने सबको चौंका दिया।
टिकट कटने के पीछे के सियासी समीकरण
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने और आशुतोष तिवारी को मौका मिलने के पीछे मध्य प्रदेश बीजेपी की अंदरूनी खींचतान को मुख्य वजह माना जा रहा है:
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शिवराज सिंह चौहान से पुरानी अदावत: राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा के बीच कभी पटरी नहीं बैठी। साल 2023 के चुनाव में जहां बीजेपी ने ‘लाडली बहना योजना’ के दम पर 164 सीटें जीतीं, वहीं नरोत्तम मिश्रा दतिया से करीब 7,500 वोटों से चुनाव हार गए थे। इस हार के पीछे भी इसी अंदरूनी अदावत को जिम्मेदार माना जाता रहा है।
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संघ (RSS) का वरदहस्त: नरोत्तम मिश्रा की जगह टिकट पाने वाले आशुतोष तिवारी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का करीबी माना जाता है। शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में वे म.प्र. हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे हैं। संघ के बड़े पदाधिकारियों के आशीर्वाद के चलते ही मिश्रा का टिकट काटकर तिवारी को मैदान में उतारा गया है।
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विश्वास में न लेने का आरोप: नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का कहना है कि यह उनका बड़ा अपमान है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मिश्रा के विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों को आधार बनाया गया, जबकि पार्टी में ऐसे नेताओं की लंबी कतार है। टिकट काटने से पहले उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए था।
कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल
बीजेपी के इस आंतरिक विस्फोट से विपक्षी दल कांग्रेस बेहद गदगद है। अब तक कांग्रेस राजेंद्र भारती की सजा के बाद मजबूत उम्मीदवार की तलाश में माथापच्ची कर रही थी। भारती के परिवार (पत्नी और बेटे) ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था क्योंकि वे नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ दोबारा कड़ा मुकाबला मान रहे थे। लेकिन अब बीजेपी में मचे इस घमासान और आशुतोष तिवारी के नाम के ऐलान के बाद कांग्रेस में टिकट के दावेदारों की लाइन लग गई है। कांग्रेस का मानना है कि दतिया की राह अब उनके लिए बेहद आसान हो गई है।








