मुंगेली। मुंगेली जिले में इन दिनों कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा एक विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि कलेक्टर कुंदन कुमार ने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए एक आवेदन को सार्वजनिक रूप से फेंक दिया। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश बताया है।
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विवाद की जड़: क्या है सोशल मीडिया का दावा? सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट्स के अनुसार, कुछ लोग जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। आरोप है कि कलेक्टर ने न केवल आवेदन का अनादर किया, बल्कि उसे फेंक भी दिया। इस घटना को स्थानीय अस्मिता और छत्तीसगढ़ी भाषा के अपमान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है।
प्रशासनिक पक्ष: नारेबाजी और शासकीय कार्य में बाधा का आरोप जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी’ के कार्यकर्ता बिना पूर्व अनुमति के कलेक्टर कार्यालय के वेटिंग एरिया में जमा हो गए थे। प्रशासन के मुताबिक:
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प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय परिसर में नारेबाजी की जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ।
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कर्मचारियों के साथ बहस की गई और अनावश्यक भीड़ जुटाई गई।
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आवेदन फेंकने की बात पूरी तरह निराधार है; ज्ञापन को नियमानुसार स्वीकार किया गया था।
कानूनी कार्रवाई और सीसीटीवी साक्ष्य घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने सिटी कोतवाली मुंगेली में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि 24 अप्रैल की दोपहर प्रदर्शनकारियों के हंगामे के कारण अधिकारियों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन का दावा है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद है, जो जांच में अहम सबूत साबित होगी।
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया के दावों और प्रशासन की आधिकारिक सफाई के बीच अटका हुआ है। सच्चाई का खुलासा पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के बाद ही हो पाएगा।
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