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छत्तीसगढ़ में पेपर लीक और नकल माफियाओं की खैर नहीं: नया सख्त कानून लागू, 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान

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रायपुर 25 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और सरकारी भर्तियों में शुचिता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ‘छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026’ अब आधिकारिक रूप से राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होकर पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है।

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यह कानून विशेष रूप से उन संगठित गिरोहों और नकल माफियाओं को निशाना बनाता है जो पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों के माध्यम से परीक्षाओं की विश्वसनीयता को खंडित करते हैं। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप, यह कानून CGPSC, व्यापमं और सभी निगम-मंडलों की परीक्षाओं पर समान रूप से लागू होगा।

नए कानून के कड़े प्रहार: मुख्य बिंदु

  • संगठित अपराध पर लगाम: परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक में शामिल पाए जाने पर दोषियों को 3 से 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।

  • आर्थिक दंड की मार: संस्थानों या गिरोहों की संलिप्तता होने पर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

  • अभ्यर्थियों के लिए चेतावनी: नकल करने वाले परीक्षार्थियों का न केवल परिणाम रद्द होगा, बल्कि उन्हें 1 से 3 साल तक के लिए राज्य की किसी भी भर्ती परीक्षा से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

  • सर्विस प्रोवाइडर की जिम्मेदारी: यदि कोई निजी संस्थान या एजेंसी परीक्षा में धांधली करती है, तो परीक्षा का पूरा खर्च उसी से वसूला जाएगा और उसे हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

  • अवैध गतिविधियों पर नजर: प्रश्न पत्र समय से पहले खोलना या मूल्यांकन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की जेल हो सकती है।

युवाओं के भरोसे की जीत

राज्य सरकार का यह कदम भर्ती प्रणालियों पर युवाओं का खोया विश्वास वापस लाने के लिए उठाया गया है। इस कानून के लागू होने से अब मेधावी छात्रों को उनके हक का रोजगार मिलने की राह आसान होगी और भ्रष्टाचार पर सीधी चोट लगेगी।

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