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लोकतंत्र की जीत: पश्चिम बंगाल चुनाव में 92% ऐतिहासिक मतदान पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई खुशी

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नई दिल्ली 25 अप्रैल 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुए भारी मतदान और हिंसा में कमी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य की जनता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सराहना की है। पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने मतदान के आंकड़ों पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया।

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प्रमुख बिंदु: न्यायमूर्तियों की अहम टिप्पणियां

  • लोकतंत्र में शक्ति का एहसास: मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब नागरिक मतदान के महत्व को समझते हैं, तो वे हिंसा का रास्ता छोड़ देते हैं। उन्होंने टिप्पणी की, “यदि लोग लोकतंत्र में अपने मताधिकार की शक्ति को पहचानते हैं और मूल्यों का पालन करते हैं, तो वे हिंसा में लिप्त नहीं होते। शक्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही निहित है।”

  • प्रवासी श्रमिकों की वापसी: वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत को अवगत कराया कि न केवल स्थानीय निवासियों ने, बल्कि देश भर से प्रवासी श्रमिकों ने भी वापस लौटकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिससे मतदान प्रतिशत 92% तक पहुंच गया।

  • हिंसा में कमी: न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने इस बात को रेखांकित किया कि मतदान के दौरान हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना की, हालांकि उन्होंने कुछ छिटपुट घटनाओं का जिक्र भी किया।

  • गरीबों की पीड़ा पर मार्मिक टिप्पणी: बहस के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने एक प्रसिद्ध बंगाली कहावत का उल्लेख किया— “राजाये राजाये युद्ध हाये, उलुखग्रार प्राण जाए” (राजाओं के युद्ध में हमेशा गरीब जनता ही कष्ट भोगती है और जान गंवाती है)।


सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश

न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली सहित पीठ ने मामले को पुनः सूचीबद्ध करते हुए उन मतदाताओं को राहत दी है जिनका नाम मतदाता सूची से बाहर था या जिन्हें नामांकन से संबंधित शिकायतें थीं। न्यायालय ने ऐसे व्यक्तियों को अपनी शेष शिकायतों के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय या अपीलीय न्यायाधिकरण से संपर्क करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।


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