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कोयला लेवी घोटाला: हाईकोर्ट से निलंबित IAS रानू साहू को बड़ा झटका, सभी 9 अपीलें खारिज

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बिलासपुर 23 अप्रैल 2026 । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी (Coal Levy) और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और उनके परिजनों को कड़ा झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने रानू साहू और उनके परिवार द्वारा दायर सभी 9 अपीलों को खारिज कर दिया है।

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अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को जायज ठहराते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अपराध से अर्जित सटीक संपत्ति (Proceeds of Crime) का सीधा पता नहीं चलता है, तो कानूनन ED उसके समान मूल्य की अन्य संपत्तियों को भी कुर्क (Attach) करने का अधिकार रखती है।


मामले के मुख्य बिंदु

  • ED का आरोप: छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली का सिंडिकेट चल रहा था। आरोप है कि रानू साहू ने कोरबा और रायगढ़ कलेक्टर रहते हुए इस नेटवर्क को संरक्षण दिया और करीब 5.52 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।

  • याचिकाकर्ताओं का तर्क: रानू साहू के पक्ष ने दलील दी थी कि कुर्क की गई कई संपत्तियां साल 2020 से पहले खरीदी गई थीं, जबकि कथित घोटाला उसके बाद शुरू हुआ। इसलिए इन्हें अपराध की कमाई से जोड़ना गलत है।

  • जांच में क्या मिला: ED की जांच में महासमुंद और अन्य इलाकों में परिजनों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन मिलने की पुष्टि हुई है। ये निवेश उसी समय किए गए जब रानू साहू प्रभावशाली पदों पर तैनात थीं।

कार्रवाई का घटनाक्रम

  1. 2022: ED ने रानू साहू के पांडुका स्थित निवास और कलमीदादर फार्महाउस पर छापेमारी की।

  2. जब्ती: करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों को ED ने अटैच किया।

  3. कानूनी लड़ाई: इस कुर्की को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे अब अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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