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युद्ध की आहट के बीच समंदर चीर कर निकले भारतीय गैस टैंकर, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ ने पार किया मौत का रास्ता

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//लगभग 92,700 टन एलपीजी (LPG) से लदे ये जहाज 16 और 17 मार्च तक गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर लंगर डालेंगे।//

नई मांदिल्ली | 14 मार्च 2026 

नई दिल्ली 14 मार्च 2026 : मध्य-पूर्व में मंडराते युद्ध के बादलों और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। इस भीषण संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर दो विशाल भारतीय गैस टैंकर— ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’— अब सुरक्षित भारतीय जल सीमा की ओर बढ़ रहे हैं।

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने शनिवार को पुष्टि की कि दोनों जहाजों ने बिना किसी नुकसान या रुकावट के इस ‘मौत के रास्ते’ को पार कर लिया है। लगभग 92,700 टन एलपीजी (LPG) से लदे ये जहाज 16 और 17 मार्च तक गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर लंगर डालेंगे।

सैकड़ों जहाजों के बीच से निकला भारत का ‘कवच’

ईरान और ओमान के बीच का यह संकरा समुद्री रास्ता इस समय युद्ध का अखाड़ा बना हुआ है, जहाँ अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद सैकड़ों कमर्शियल जहाज फंसे हुए हैं। इस तनावपूर्ण माहौल के बावजूद, भारतीय शिपिंग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के निरंतर समन्वय ने इन जहाजों का रास्ता साफ किया। वर्तमान में 22 अन्य भारतीय जहाज भी इसी क्षेत्र में हैं, जिन पर सवार 611 नाविक पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

घरेलू बाजार में राहत, पैनिक बुकिंग से बचने की अपील

जहाजों के सुरक्षित निकलने की खबर ऐसे समय में आई है जब देश में एलपीजी की मांग अचानक बढ़ गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन उपभोक्ताओं में घबराहट की वजह से बुकिंग 7.6 मिलियन से उछलकर 8.8 मिलियन तक पहुंच गई है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि क्रूड ऑयल का भंडार पर्याप्त है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं।

नाविकों की घर वापसी जारी

संकटग्रस्त क्षेत्र से अब तक कुल 253 भारतीय नाविक सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। सरकार ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि आने वाले एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर ‘बर्थ’ दी जाए ताकि घरेलू आपूर्ति में कोई रुकावट न आए।


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