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[ व्यंग्य रिपोर्ट ] जब रमन ‘सिंह’ की दहाड़ से सुधरा कलेक्टर-एसपी का ‘प्रोटोकॉल-आसन’, बेमेतरा में पीछे से स्वागत की ‘अद्भुत’ लीला!

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 छत्तीसगढ़ : कहते हैं कि राजनीति में लोग पीठ पीछे वार करते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला प्रशासन ने एक कदम आगे बढ़कर एक नई परंपरा की खोज कर डाली—“पीठ पीछे से मुख्यमंत्री का स्वागत करना!”

जी हां, रविवार को बेमेतरा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनके मंत्रियों की संभाग स्तरीय बैठक थी। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// अब हमारे होनहार कलेक्टर और एसपी साहब ने बैठक के लिए ऐसी दिव्य जगह चुनी कि जो भी अतिथि या नेता मुख्यमंत्री जी का स्वागत करने आ रहा था, उसे मंच के सामने से नहीं, बल्कि माननीय मुख्यमंत्री जी की पीठ के पीछे से रेंगते हुए जाना पड़ रहा था। इसे कहते हैं—“प्रशासनिक बैक-डोर डिप्लोमेसी!”

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मौन रहे साय, पर जाग उठे ‘रमन’

इस अनूठी और ‘ऐतिहासिक’ व्यवस्था को देखकर खुद मुख्यमंत्री और उनके दोनों उपमुख्यमंत्री तो  मौन रहे (शायद वो सोच रहे होंगे कि छत्तीसगढ़ में अब स्वागत के लिए भी शॉर्टकट रास्ता अपनाना पड़ता है)। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// लेकिन, हमेशा शांत और मुस्कुराते रहने वाले विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से प्रशासन का यह ‘पीछे से वार’ बर्दाश्त नहीं हुआ।

डॉ. रमन सिंह ने अपने अंदर के ’15 साल वाले मुख्यमंत्री’ को जगाया और कलेक्टर-एसपी की क्लास लगा दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:

“ढाई घंटे में तुम लोग एक ढंग का कमरा नहीं ढूंढ पाए? और इतनी नकारात्मकता कि गलती बताने के बाद भी टस से मस नहीं हुए! भाई, मैंने 15 साल राज किया है, पर ऐसी ‘असाधारण’ और महान अव्यवस्था आज तक नहीं देखी।”

अब साहब, जब ‘चावल वाले बाबा’ (डॉ. रमन सिंह) इस तरह गरम हुए, तो अधिकारियों के चेहरे का रंग ऐसा उड़ा जैसे बिना तड़के की दाल!

विपक्ष की ‘चाट-पकौड़ी’ और वायरल वीडियो

इधर अधिकारियों की क्लास लग रही थी, उधर विपक्ष (कांग्रेस) के हाथ में मुफ्त की ‘चाट-पकौड़ी’ आ गई। दुर्ग के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने तुरंत कैमरे का सही इस्तेमाल किया, वीडियो बनाया और इंस्टाग्राम पर रील बनाकर चमका दिया। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// बैकग्राउंड में भले ही कोई गाना न हो, लेकिन अधिकारियों के दिल की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं।

अंतिम टिप्पणी

राजनीतिक पंडित दबी जुबान में कह रहे हैं कि बेमेतरा तो सिर्फ झांकी है, पूरे प्रदेश में  अफसरशाही की मौज चल रही है। इन बेलगाम प्रशासनिक घोड़ों को लगता है कि सरकार चाहे जिसकी हो, असली ‘सिंहासन’ तो वही संभालते हैं।

सत्ता के गलियारों में बैठे नेताओं को भले ही चारों तरफ ‘सावन का हरा-हरा’ दिख रहा हो, लेकिन अगर इन साहबों की ‘मुश्कें’ (लगाम) समय रहते नहीं कसी गईं, तो जनता 2018 की तरह ऐसा ‘यू-टर्न’ मारेगी कि फिर अधिकारी अगली बैठक में सामने से तो क्या, पीछे से भी पानी पूछने नहीं आएंगे!

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