The Khatiya Khadi News : शरीर के भीतर खामोशी से पनपने वाली बीमारियां अक्सर तब सामने आती हैं जब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका होता है। ‘विश्व किडनी दिवस 2026’ (12 मार्च) के अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि भारत में किडनी फेलियर का सबसे बड़ा कारण ‘अनियंत्रित ब्लड प्रेशर’ बनकर उभर रहा है।

किडनी: शरीर का ‘अदृश्य’ वॉरियर
हमारी किडनियां केवल गंदगी साफ करने वाले अंग नहीं हैं, बल्कि ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाने और रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी पैदा करती हैं। एक स्वस्थ किडनी में लाखों सूक्ष्म ‘नेफ्रॉन्स’ (फिल्टर) होते हैं, जो रक्त को शुद्ध करते हैं।
हाई बीपी कैसे बनता है काल?
जब रक्त का दबाव (BP) लगातार बढ़ा रहता है, तो किडनी की सूक्ष्म रक्त नलिकाएं सख्त और संकुचित होने लगती हैं। इसे ‘नेफ्रोस्क्लेरोसिस’ कहा जाता है।
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फिल्ट्रेशन में बाधा: दबाव के कारण फिल्टर डैमेज हो जाते हैं और प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है।
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टॉक्सिन्स का जमाव: जब किडनी सफाई नहीं कर पाती, तो क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे जहरीले तत्व खून में घुलने लगते हैं।
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दुष्चक्र: खराब किडनी ब्लड प्रेशर को और बढ़ाती है, और बढ़ा हुआ बीपी किडनी को और ज्यादा डैमेज करता है। यह एक जानलेवा चक्र है।
आधुनिक जीवनशैली: बीमारी का निमंत्रण

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और शारीरिक श्रम की कमी ने 30-40 वर्ष की उम्र के युवाओं को भी हाई बीपी का मरीज बना दिया है। देर रात तक जागना और तनाव (Stress) इस आग में घी का काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञ सलाह: “अगर आपका बीपी 140/90 से ऊपर रहता है, तो आप रिस्क जोन में हैं। किडनी को बचाने का सबसे सस्ता और सरल तरीका है- समय पर जांच और नमक पर नियंत्रण।”
बचाव के 5 सुनहरे नियम
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नमक से दूरी: दिन भर में 5 ग्राम (एक चम्मच) से ज्यादा नमक न लें।
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पानी का सही संतुलन: न बहुत कम पिएं, न ही जबरन बहुत ज्यादा।
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पेनकिलर्स से बचें: बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं लेना किडनी के लिए जहर समान है।
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सक्रिय दिनचर्या: रोजाना कम से कम 45 मिनट की वॉक या योग।
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नियमित चेकअप: साल में एक बार KFT (किडनी फंक्शन टेस्ट) जरूर कराएं।








