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मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना 2026: अब पैसों की कमी से नहीं रुकेगी पढ़ाई; कोचिंग और कॉलेज की फीस भरेगी सरकार, जानें पात्रता और लाभ

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रायपुर 24 फरवरी | छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के होनहार विद्यार्थियों के लिए ‘मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना’ का शंखनाद कर दिया है। वित्त मंत्री ने बजट में इसके लिए 10 करोड़ रुपये का शुरुआती प्रावधान किया है। यह योजना विशेष रूप से उन छात्रों के लिए संजीवनी साबित होगी जो पीएससी, यूपीएससी या नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पीछे रह जाते हैं।

योजना की पात्रता (Eligibility)

योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने प्राथमिक तौर पर निम्नलिखित मानक तय किए हैं:

  • मूल निवासी: आवेदक का छत्तीसगढ़ का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।

  • आर्थिक स्थिति: यह योजना मुख्य रूप से बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) श्रेणी और कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए है।

  • शैक्षणिक योग्यता: छात्र का पिछली कक्षा (10वीं या 12वीं) में न्यूनतम निर्धारित अंकों (संभावित 60-70%) के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

  • कोर्स चयन: स्नातक (Graduation), स्नातकोत्तर (Post Graduation) और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग ले रहे छात्र इसके पात्र होंगे।

सहायता राशि और लाभ (Benefits)

योजना के तहत मिलने वाली मदद को दो प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है:

  1. कोचिंग सहायता: प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, CGPSC, SSC, NEET, JEE) की तैयारी के लिए कोचिंग फीस का एक बड़ा हिस्सा सीधे संस्थान या छात्र के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।

  2. उच्च शिक्षा स्कॉलरशिप: कॉलेज की फीस, हॉस्टल का खर्च और किताबों के लिए सालाना 25,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की एकमुश्त सहायता दी जा सकती है (अंतिम दिशा-निर्देशों के आधार पर)।

  3. विशेष प्रोत्साहन: दिव्यांग और अनाथ बच्चों के लिए इस योजना के तहत 100% फीस प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया जा सकता है।

आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेज

सरकार जल्द ही इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करेगी। छात्रों को निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

  • आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र।

  • आय प्रमाण पत्र (तहसीलदार द्वारा जारी)।

  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।

  • पिछली कक्षा की मार्कशीट।

  • बैंक पासबुक की कॉपी।

विशेष नोट: वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह 10 करोड़ का बजट केवल शुरुआत है। जैसे-जैसे आवेदकों की संख्या बढ़ेगी, भविष्य में इस राशि को और बढ़ाया जाएगा ताकि प्रदेश का हर बच्चा शिक्षित और सशक्त बन सके।

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