कोरबा। जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कटोरी नगोई का आश्रित ग्राम धोबीबारी इन दिनों हाथियों के भीषण आतंक और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। पिछले 5-6 दिनों से करीब 50 जंगली हाथियों के एक विशाल दल ने गांव में डेरा डाल रखा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
आशियाने उजड़े, खुले आसमान के नीचे ग्रामीण
हाथियों के झुंड ने गांव पर हमला कर सभी कच्चे मकानों को मलबे के ढेर में बदल दिया है। इस तबाही में पंडो, रजवार, गोंड और धोबी समुदाय के लगभग 10 परिवार बेघर हो गए हैं। कड़कड़ाती ठंड और सुरक्षा के अभाव में ये परिवार अब जंगल के पेड़ों के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास अब न तो सिर छिपाने की जगह बची है और न ही पेट भरने के लिए राशन।
मवेशियों की मौत और राशन का संकट
हाथियों का यह दल हर दिन शाम 4 बजे के करीब गांव की सीमा में प्रवेश कर जाता है। बीते 11 फरवरी को हाथियों ने चार मवेशियों को कुचलकर मार डाला। जान बचाने के लिए ग्रामीणों को मीलों दूर भागना पड़ा। घर टूटने के साथ ही पीडीएस (PDS) से मिला महीनों का राशन भी हाथियों ने चट कर दिया या बर्बाद कर दिया, जिससे गांव में अब भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
हाथियों की लगातार मौजूदगी और होते नुकसान के बावजूद वन विभाग की टीम मौके से नदारद या निष्क्रिय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
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विभाग की ओर से हाथियों को खदेड़ने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
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प्रभावित परिवारों को अब तक कोई फौरी राहत या सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है।
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विभाग की इस ‘सुस्ती’ के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
“यदि प्रशासन ने समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और भी भयानक हो सकती है। अब हमें जान का खतरा सता रहा है।” — मुखिया, पंडो समाज
मांग: मुआवजा और तत्काल सुरक्षा
धोबीबारी के ग्रामीण अब एकजुट होकर प्रशासन और वन विभाग से तत्काल मुआवजे, राशन की व्यवस्था और हाथियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी सुध नहीं ली गई, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।








