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बजट 2026: छत्तीसगढ़ बनेगा देश का ‘लॉजिस्टिक्स पावर हाउस’, खनन गलियारे और फार्मा शक्ति से बदल जाएगी प्रदेश की सूरत

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नई दिल्ली/रायपुर | ब्यूरो केंद्रीय बजट 2026-27 छत्तीसगढ़ के लिए विकास के नए द्वार खोलने वाला साबित हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित ‘खनन गलियारे’ (Mining Corridor) ने प्रदेश की खनिज संपदा को वैश्विक बाजार से जोड़ने की नींव रख दी है। जानकारों का मानना है कि इस घोषणा से छत्तीसगढ़ न केवल कच्चा माल निर्यात करने वाला राज्य रहेगा, बल्कि देश के बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभरेगा।

खनिजों की ढुलाई होगी आसान, घटेगी लॉजिस्टिक्स लागत

प्रदेश के लिए सबसे बड़ी राहत ‘खनन गलियारे’ के रूप में आई है। यह गलियारा राज्य के प्रमुख खनन क्षेत्रों जैसे कोरबा, दंतेवाड़ा और बालोद को सीधे समुद्री बंदरगाहों और बड़े औद्योगिक केंद्रों से जोड़ेगा। वर्तमान में सड़कों पर भारी दबाव और मालगाड़ियों की सीमित संख्या के कारण ढुलाई में लगने वाला समय अब काफी कम हो जाएगा। इससे स्टील, कोयला और एल्युमिनियम उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी, जिससे छत्तीसगढ़ के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।

लिथियम और सेमीकंडक्टर: भविष्य की तैयारी

छत्तीसगढ़ अब सिर्फ लोहे और कोयले तक सीमित नहीं है। बजट में घोषित इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) का लाभ राज्य को मिलने की पूरी संभावना है, क्योंकि कटघोरा (कोरबा) में देश के पहले लिथियम ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है। लिथियम, जो बैटरी निर्माण के लिए अनिवार्य है, इस नए खनन गलियारे के जरिए तेजी से प्रोसेसिंग यूनिट्स तक पहुंचेगा। इसके साथ ही, आईटी और सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र में युवाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की भी राह खुली है।

‘बायो-फार्मा शक्ति’ से नवा रायपुर को लगेंगे पंख

केंद्र सरकार की ₹10,000 करोड़ की नई योजना ‘बायो-फार्मा शक्ति’ का सीधा कनेक्शन नवा रायपुर में बन रहे फार्मा पार्क से जुड़ता दिख रहा है। बजट में बायोलॉजिक्स और दवाओं के घरेलू उत्पादन पर दिए गए जोर से छत्तीसगढ़ के फार्मा सेक्टर में बड़े निवेश की उम्मीद है। अगले पांच वर्षों में इस सेक्टर के माध्यम से राज्य में हजारों कुशल युवाओं को रोजगार मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।

निर्यात और राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि की उम्मीद

इस बजट प्रावधानों के लागू होने से छत्तीसगढ़ के खनिज राजस्व में 12 से 15 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखी जा सकती है। रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के साथ इस नए माइनिंग कॉरिडोर का मेल छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट गेटवे बना देगा। बुनियादी ढांचे में सुधार से बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, जिससे समावेशी विकास का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।

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