कोरबा। लोकतंत्र की नींव कहे जाने वाले ‘मताधिकार’ पर कोरबा में एक बड़ा हमला होने का मामला प्रकाश में आया है। छत्तीसगढ़ राज्य की मतदाता सूची 2025-26 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक सुनियोजित साजिश के तहत एक विशेष समुदाय के 1500 से अधिक मतदाताओं के नाम विलोपित (हटाने) कराने का प्रयास किया जा रहा है।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद गुरुवार को मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और एडीएम देवेंद्र पटेल को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
साजिश का ‘फॉर्म-7’ कनेक्शन: थोक में दर्ज हुईं झूठी शिकायतें
पूरा मामला तब गरमाया जब सोशल मीडिया पर लगभग 1566 मतदाताओं की एक सूची वायरल हुई। आरोप है कि अज्ञात शरारती तत्वों ने निर्वाचन आयोग के ‘फॉर्म-7’ का गलत इस्तेमाल कर थोक में झूठी शिकायतें दर्ज करा दीं। इन शिकायतों में दावा किया गया है कि ये सभी मतदाता संबंधित क्षेत्रों से पलायन कर चुके हैं या वहां नहीं रहते।
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन के एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया ने निर्वाचन प्रणाली की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह एक गहरी राजनीतिक और सामाजिक साजिश है ताकि एक विशेष वर्ग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा सके।
प्रशासन सख्त: बिना फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं कटेंगे नाम

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर (ADM) देवेंद्र पटेल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नागरिक को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि:
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किसी भी वैध मतदाता का नाम बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के सूची से नहीं हटाया जाएगा।
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शिकायतों की बारीकी से जांच की जा रही है।
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नियमों के विरुद्ध कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
समाज की दो टूक मांग: दोषियों को बेनकाब करे पुलिस
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
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नाम उजागर हों: उन ‘अज्ञात’ व्यक्तियों की सूची सार्वजनिक की जाए जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए हैं।
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FIR दर्ज हो: झूठी शिकायत कर प्रशासन को गुमराह करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
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प्रक्रिया पर रोक: जब तक शत-प्रतिशत जांच पूरी न हो, किसी भी नाम को सूची से विलोपित न किया जाए।
रोष में अल्पसंख्यक समुदाय
इस घटना के बाद से कोरबा के अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में भारी नाराजगी और तनाव का माहौल है। जानकारों का मानना है कि यह घटना केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में सेंधमारी का गंभीर प्रयास है। अब सबकी नजरें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि वह उन ‘अदृश्य चेहरों’ को कब तक बेनकाब कर पाता है।








