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रायपुर पुलिस के नशा विरोधी आदेश पर भूपेश बघेल का तंज: “शराब रोकने के लिए ग्लास और चखने पर पाबंदी जैसा है यह फैसला”

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता  भूपेश बघेल ने रायपुर पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी एक हालिया आदेश पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरते हुए बघेल ने इस आदेश को ‘अजब-गजब’ करार दिया और नशा मुक्ति के सरकारी प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नशे की सामग्री पर रोक, पर मूल नशा कैसे रुके?

भूपेश बघेल ने अपने पोस्ट में रायपुर पुलिस के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें नशा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली सहायक सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है। इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने लिखा— “यह तो ठीक वैसा ही है कि शराब का सेवन रोकने के लिए आप डिस्पोजल ग्लास, कांच के गिलास या चखने की बिक्री पर रोक लगा दें। सवाल यह है कि मूल कारण, यानी गांजा और चरस की उपलब्धता रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है?”

आदेश की अवधि और मंशा पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आदेश की कानूनी और तार्किक वैधता पर तीन प्रमुख आपत्तियां दर्ज की हैं:

  • केवल दो महीने का आदेश क्यों?: बघेल ने पूछा कि यदि नशा रोकना है, तो इस आदेश को स्थायी क्यों नहीं बनाया गया? इसे सिर्फ 29 मार्च 2026 (दो महीने) तक ही क्यों लागू किया गया है?

  • वापसी का रास्ता किसके लिए?: आदेश में लिखी गई लाइन “यदि बीच में वापस न लिया गया” पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि वह कौन सी शक्ति है जो इस आदेश को बीच में रोक सकती है?

  • मीडियाबाजी का आरोप: उन्होंने कहा कि नशा केवल रायपुर में नहीं बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ इसकी गिरफ्त में है। सरकार को ‘मीडियाबाजी’ के बजाय गंभीर आदेश निकालने चाहिए।

सरकार ने स्वीकार किया रायपुर में बढ़ा नशा!

भूपेश बघेल ने तर्क दिया कि पुलिस के इस आदेश से एक बात साफ हो गई है कि अब सरकार खुद यह स्वीकार कर रही है कि राजधानी रायपुर में गांजा, चरस और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन बड़े पैमाने पर हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार गंभीर नहीं हुई, तो केवल कागजी आदेशों से राज्य को नशे की गिरफ्त से बाहर नहीं निकाला जा सकेगा।

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