Latest News
गणेशोत्सव जुलूस के दौरान डीजे पर नाचने को लेकर विवाद, चाकूबाजी में 16 वर्षीय किशोर की मौत भारत की थाली का सच: क्या भारत केवल शाकाहारी देश है? BRICS डिनर, राहुल गांधी का दावा और भारतीय खान-पान का इतिहास कैल्शियम स्कोर सही, तो भी दिल की बीमारी का खतरा? जानिए क्या कहती है 10 साल की यह नई रिसर्च कोरबा में आसमान में दिखा अद्भुत नजारा: अर्धचंद्र के ऊपर चमका बेहद खूबसूरत तारा, जानें क्या है इसका खगोलीय सच बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ गणेशोत्सव से पहले कोरबा पुलिस का बड़ा एक्शन: एक ही दिन में 105 अपराधियों पर कार्रवाई, 60 वारंटी भेजे गए जेल
Home » छत्तीसगढ़ » अन्नदाता की बेबसी: धान न बिकने से टूटी आस, किसान ने मौत को गले लगाने के लिए खाया जहर.. अस्पताल पहुँचीं कोरबा सांसद

अन्नदाता की बेबसी: धान न बिकने से टूटी आस, किसान ने मौत को गले लगाने के लिए खाया जहर.. अस्पताल पहुँचीं कोरबा सांसद

Share:

कोरबा, छत्तीसगढ़। खरीदे केंद्रों की अव्यवस्था और सिस्टम की बेरुखी ने एक और किसान को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। कोरबा जिले के ग्राम पुटा (हरदीबाजार) के किसान सुमेर सिंह ने अपनी उपज न बिक पाने से हताश होकर जहर का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वे जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

महीनों से काट रहा था चक्कर, नहीं मिला टोकन

जानकारी के मुताबिक, किसान सुमेर सिंह पिछले एक महीने से अपनी धान की फसल बेचने के लिए सहकारी समिति के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि फड़ प्रभारी द्वारा उसे लगातार ‘आज-कल’ कहकर टाला जा रहा था और उसे धान खरीदी का टोकन भी जारी नहीं किया गया। सिस्टम की इस प्रताड़ना से तंग आकर किसान ने कलेक्ट्रेट में आयोजित जनदर्शन में भी गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से भी उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। अंततः निराशा के अंधेरे में डूबे किसान ने मौत का रास्ता चुन लिया।

अस्पताल पहुँचीं सांसद, जाना हाल-चाल

घटना की सूचना मिलते ही कोरबा प्रवास पर मौजूद सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत तुरंत जिला अस्पताल पहुँचीं। उन्होंने पीड़ित किसान और उसके परिजनों से मुलाकात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए। सांसद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों के प्रति घोर संवेदनहीनता करार दिया है।

व्यवस्था पर उठे सवाल

सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर किसानों की यह स्थिति चिंताजनक है। एक तरफ शासन-प्रशासन सुचारू धान खरीदी के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुमेर सिंह जैसे किसान अपनी मेहनत का मोल पाने के लिए जहर खाने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले में लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

Leave a Comment

latest news