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300 से ज्यादा एनकाउंटर  करने वाली लेडी सिंघम’ शाहिदा परवीन गांगुली, कश्मीर में आतंकवादी नाम से घबराते हैं..दिल्ली ब्लास्ट की जांच के लिए लाल किले पर दिखी

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Delhi Blast Case : दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए कार बम धमाके में अब तक 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस सनसनीखेज मामले की जांच अब देश के टॉप पुलिस अधिकारियों के हाथों में है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ-साथ कई आईपीएस (IPS) अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें सबसे चर्चित नाम है कश्मीर की बहादुर महिला आईपीएस अधिकारी शाहिदा परवीन गांगुली का, जिन्हें ‘लेडी सिंघम’ और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ कहा जाता है। धमाके के तुरंत बाद उन्हें लाल किले की उस जगह पर देखा गया, जहां विस्फोटक से लदी कार फटी थी।

शाहिदा परवीन जम्मू-कश्मीर की एक किंवदंती हैं, जिन पर जम्मू-कश्मीर पुलिस नहीं पूरे देश को नाज है. 10 नवंबर को केस में उनकी घटनास्थल पर मौजूदगी बता रहा है कि इस केस की जांच में शाहिदा परवीर की आने वाले दिनों में अहम भूमिका होने वाली है.

शाहिदा परवीन 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ कई साहसिक ऑपरेशनों का नेतृत्व किया. उनका जन्म जम्मू-कश्मीर में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी शादी के बाद गांगुली सरनेम अपनाया, जो उनके पति के बंगाली बैकग्राउंड को दर्शाता है. वे 1997 बैच की IPS अधिकारी हैं और लंबे समय तक स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) का हिस्सा रहीं, जहां उन्होंने कई आतंकियों का सामना किया और उन्हें खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

300 से ज्यादा एनकाउंटर

कश्मीर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की कमांडो रहते हुए शाहिदा परवीन ने करीब 300 से अधिक एनकाउंटर किए। इनमें दर्जनों खतरनाक आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया। कश्मीर में एसीपी बनने के बाद वह आतंकवादियों के लिए बुरे सपने से कम नहीं रहीं। उनकी रणनीति इतनी शानदार थी कि आतंकियों की हर मूवमेंट और प्लान की भनक उन्हें पहले ही लग जाती थी। यही वजह है कि घाटी में आतंकी उनके नाम से थर-थर कांपते हैं। लोग उन्हें प्यार से लेडी सिंघम बुलाते हैं।

दिल्ली ब्लास्ट में अहम भूमिका
शाहिदा परवीन गांगुली के आतंकवाद विरोधी अनुभव और कुशल रणनीति को देखते हुए दिल्ली लाल किला बम धमाके की जांच में उन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई है। वह जांच टीम की प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह सादे कपड़ों में पुलिस टीम के साथ लाल किले की घटनास्थल पर निरीक्षण करती नजर आ रही हैं।

बता दे की 1997 से 2002 तक वे की एलीट यूनिट स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) में रहीं. यह यूनिट आतंकवादियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई के लिए जानी जाती है. शाहिदा ने कई एनकाउंटर ऑपरेशनों में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने हथियारबंद आतंकियों का मुकाबला किया. एक चर्चित घटना में उन्होंने 1999 में एक घात लगाकर हमले को नाकाम किया, जिसमें कई आतंकी मारे गए. उनके साहस के लिए उन्हें गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया. SOG से बाहर आने के बाद वे क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) बनीं, जहां उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल टेरर केसों की जांच की.

इन ऑपरेशनों में शामिल रहीं.

1- 2000 के दशक में कश्मीर घाटी में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के कई मॉड्यूल्स को ध्वस्त करने में योगदान.
2- 2005 में एक बड़े आतंकी कंस्पिरेसी केस में मुख्य जांच अधिकारी के रूप में काम किया, जिसके परिणामस्वरूप कई गिरफ्तारियां हुईं.
3- महिलाओं के खिलाफ अपराधों और साइबर क्राइम पर फोकस करते हुए, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई जागरूकता कैंपेन चलाए.

ब्राम्हण परिवार में शादी 

शाहिदा की शादी एक ब्राह्मण बंगाली परिवार में हुई, जिसके कारण उनका सरनेम ‘गांगुली’ पड़ा. वे दो बच्चों की मां हैं और अपने परिवार के साथ दिल्ली-एनसीआर में रहती हैं. वे योग और मेडिटेशन की शौकीन हैं, जो उन्हें तनावपूर्ण जॉब में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. उनके करियर में कुछ विवाद भी रहे. कुछ एनकाउंटरों पर मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए, लेकिन अधिकांश मामलों में कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट दी.

 

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