कोरबा छत्तीसगढ़ : नवरात्रि के पहले दिन देवपहरी में नव-निर्मित हिंगलाजगढ़ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के साथ देशभर के पांच प्रमुख शक्तिपीठों से लाए गए अखंड ज्योत कलश स्थापित किए गए। यह आयोजन गौमुखी सेवाधाम, देवपहरी में किया गया, जिसने पूरे वनांचल में भक्ति का माहौल बना दिया।

पांच शक्तिपीठों से लाई गईं अखंड ज्योतियाँ
मंदिर में स्थापित ये ज्योत कलश देश के कोने-कोने से लाए गए हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को दर्शाते हैं। ये ज्योतियाँ इन पांच शक्तिपीठों से लाई गईं:
– उत्तर में माँ वैष्णो देवी (जम्मू-कश्मीर)
– दक्षिण में माँ कामाक्षी देवी (कांचीपुरम)
– पूर्व में माँ कामाख्या देवी (असम)
– पश्चिम में माँ कालिका देवी (पावागढ़, गुजरात)
– मध्य से माँ शारदा देवी शक्ति पीठ (मध्य प्रदेश)

अखंड भारत का संकल्प और बलूचिस्तान से ज्योति की प्रतीक्षा
इस मंदिर स्थापना के साथ एक विशेष संकल्प लिया गया है। माँ हिंगलाज भवानी (बलूचिस्तान) की ज्योति कलश की वेदिका को तब तक खाली रखा जाएगा, जब तक कि बलूचिस्तान स्वतंत्र होकर भारत का हिस्सा न बन जाए। इस संकल्प के पूरा होने पर ही वहां से अखंड ज्योति लाकर इस मंदिर में स्थापित की जाएगी, जो अखंड भारत की अवधारणा को मजबूत करेगा।


भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान
ज्योत कलश के कोरबा पहुँचने पर भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। खासकर, गुजरात के पावागढ़ से आए ज्योत कलश दल का डीडीएम रोड स्थित श्री जलाराम मंदिर में ढोल-ताशे और जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान पारंपरिक रास-गरबा का भी आयोजन हुआ।
पांचों ज्योति कलश सप्तदेव मंदिर से हुए रवाना
रविवार, 21 सितंबर को, ये ज्योत कलश श्री सप्तदेव मंदिर से पारंपरिक बाजे-गाजे और भजन-कीर्तन के साथ देवपहरी के लिए रवाना हुए, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। नवरात्रि के पहले दिन, सभी अखंड ज्योतियों को हिंगलाजगढ़ मंदिर में स्थापित किया गया। मंदिर परिसर में बने ज्योति कलश भवन में सैकड़ों भक्तों ने मनोकामना ज्योति कलश भी प्रज्वलित किए। इस धार्मिक अनुष्ठान में आस-पास के गाँवों के हजारों ग्रामीण शामिल हुए, जिससे यह एक जन-आस्था का बड़ा केंद्र बन गया।








