कोरबा 18 सितंबर 2026 Tragic News : कोरबा के पाली क्षेत्र का नुनेरा गांव… जहां हर रोज सुबह बच्चों की खिलखिलाहट से गलियां चहकती थीं, वहां आज सन्नाटा भी बिलख-बिलखकर रो रहा है। सात-आठ साल की वो उम्र, जो अभी दुनिया को ठीक से समझना भी शुरू नहीं कर पाई थी, जिंदगी के उस मोड़ पर हमेशा के लिए थम गई।

गुरूवार की वो मनहूस सुबह शायद खुशियों पर किसी की काली नजर लेकर आई थी। सुबह के साढ़े दस बजे थे, जब 7 साल की इंदु, 8 साल की राखी और 8 साल की साधना खिलखिलाते हुए गांव के अलगू तालाब में नहाने पहुंचे थे। किसे पता था कि अपने नन्हे हाथों से पानी में लहरें बनाने निकले ये मासूम, कभी किनारे वापस लौटकर ही नहीं आएंगे।
जब काफी देर तक घर के आंगन में बच्चों की आवाज़ें नहीं गूंजीं, तो मां-बाप का कलेजा कांप उठा। भागते-भागते जब परिजन और ग्रामीण तालाब के किनारे पहुंचे, तो वहां सिर्फ बच्चों के पड़े हुए कपड़े और छोटी-छोटी चप्पलें मिलीं… वो चप्पलें जो चंद मिनट पहले तक उनके नन्हे कदमों का निशान थीं। तालाब की खामोश सतह पर जब इंदु की बेजान देह तैरती दिखी, तो मानो परिजनों के पांव तले से जमीन ही खिसक गई।
कांपते हाथों और भीगी आंखों से जब पानी में और तलाश शुरू हुई, तो एक-एक कर साधना और राखी के बेजान शरीर भी बाहर आ गए। जिन बच्चों को सुबह मां ने प्यार से दुलारकर भेजा था, उनके ठंडे पड़े शरीरों को देखकर पूरे गांव की चीखों से आसमान दहल उठा। एक साथ तीन मासूमों की सांसें थम जाने से गांव का हर चूल्हा बुझ गया है और हर आंख नम है।
सूचना मिलने पर पहुंची पाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन कानून की फाइलें शायद उस खालीपन को कभी नहीं भर पाएंगी, जो आज नुनेरा के तीन आंगनों में हमेशा-हमेशा के लिए पसरा रहेगा।
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