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जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर भड़की कांग्रेस, रायपुर में नाना पटोले बोले- ‘ड्रॉपडाउन लिस्ट’ बिना अधूरी रह जाएगी सामाजिक न्याय की गिनती

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 रायपुर 6 सितम्बर Congress Press Conference:  जातिगत जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नाना भाऊ पटोले ने केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए जनगणना के मौजूदा प्रारूप को बेहद ‘दोषपूर्ण’ करार देते हुए इसमें तत्काल संशोधन की मांग की है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जातियों की गिनती में पारदर्शिता और सटीकता नहीं रही, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर देश की सामाजिक न्याय नीतियों पर पड़ेगा।

रायपुर में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत भी मौजूद रहे। नेताओं ने एक सुर में कहा कि केंद्र सरकार को बिहार और तेलंगाना में अपनाई गई सफल पद्धतियों के आधार पर जातिगत जनगणना की नई प्रश्नावली तैयार करनी चाहिए।

सवाल नंबर 10 पर सबसे बड़ा ऐतराज: ‘ओपन-एंडेड’ विकल्प से बढ़ेगी गड़बड़ी

नाना पटोले ने जनगणना प्रश्नावली के सवाल नंबर 10 पर सबसे कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस के अनुसार, इस सवाल में व्यक्ति को अपनी जाति या उपजाति का नाम लिखने के लिए एक ‘ओपन-एंडेड’ (खुला) विकल्प दिया गया है।

  • आंकड़ों में बिखराव का खतरा: खुले विकल्प का अर्थ यह है कि नागरिक अपनी जाति का जो भी नाम, स्पेलिंग या स्थानीय बोली का शब्द बताएगा, गणनाकर्मी (Enumerator) उसे हूबहू दर्ज कर लेगा।

  • एक जाति, कई नाम: भारत के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति को अलग-अलग बोलियों, उपनामों या स्पेलिंग से पुकारा जाता है। खुला विकल्प होने से एक ही जाति कई अलग-अलग नामों से दर्ज हो जाएगी, जिससे वास्तविक जनसंख्या का सही आंकड़ा पाना असंभव हो जाएगा।

OBC और वंचित वर्गों की सही आबादी न आ पाने की आशंका

कांग्रेस ने चिंता जाहिर की है कि मौजूदा प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ (OBC) शब्द तक शामिल नहीं किया गया है।

पटोले के मुताबिक, इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और अन्य सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को भुगतना पड़ेगा। अगर एक ही जाति के आंकड़े अलग-अलग नामों में बंट गए, तो कागजों पर उनकी वास्तविक संख्या बेहद कम या बिखरी हुई दिखेगी।

इसका सीधा असर निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ेगा:

  1. आरक्षण नीति: नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सही प्रतिनिधित्व तय करने में।

  2. कल्याणकारी योजनाएं: छात्रवृत्ति, बजटीय आवंटन और सामाजिक योजनाओं के लाभ में।

  3. नीतिगत फैसले: इन वर्गों की सही हिस्सेदारी तय करने वाले सरकारी आंकड़ों में।

कांग्रेस का सीधा सवाल- “सरकार के पास सूची मौजूद है, तो ‘ड्रॉपडाउन’ का इस्तेमाल क्यों नहीं?”

नाना भाऊ पटोले ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारों के पास अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आधिकारिक और प्रमाणित सूचियां पहले से मौजूद हैं, तो उनका उपयोग जनगणना में क्यों नहीं किया जा रहा?

कांग्रेस ने मांग की है कि:

  • जातियों की गिनती के लिए डिजिटल या तकनीकी प्रणाली में प्रमाणित सूचियों की ‘ड्रॉपडाउन लिस्ट’ (Dropdown List) दी जाए।

  • गणनाकर्मी को केवल उस ड्रॉपडाउन सूची में से ही जाति का चयन करने का विकल्प मिले, ताकि स्पेलिंग और नाम की गड़बड़ियों से बचा जा सके।

  • तेलंगाना और बिहार के मॉडल का अध्ययन कर एक पारदर्शी और त्रुटिहीन प्रश्नावली तैयार की जाए।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए जातियों की सही और व्यवस्थित गिनती प्राथमिक शर्त है और सरकार को बिना किसी देरी के इस प्रारूप में बदलाव करना चाहिए।

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