कोरबा:
शहर के शिवाय हॉस्पिटल में 62 वर्षीय सविता जायसवाल की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों द्वारा इलाज में गंभीर लापरवाही और कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने के आरोप लगाए जाने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन ने अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि मरीज की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए थे।
अस्पताल प्रबंधन की मुख्य बातें:
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अत्यंत गंभीर स्थिति में आई थीं मरीज: अस्पताल के अनुसार, जब सविता जायसवाल को लाया गया था, तब उन्हें सांस लेने में भारी परेशानी थी और उनका ऑक्सीजन लेवल तथा ब्लड प्रेशर बेहद कम था।
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ICU से लेकर वेंटिलेटर तक का सपोर्ट: हालात की नजाकत को देखते हुए उन्हें तुरंत ICU में भर्ती किया गया। पहले उन्हें NIV सपोर्ट और स्थिति बिगड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट व एडवांस लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था।
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कोरे कागज पर हस्ताक्षर के आरोप बेबुनियाद: प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इलाज से पहले परिजनों को जोखिमों की जानकारी देकर नियमानुसार Informed Consent (सहमति पत्र) लिया जाता है, कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने का आरोप गलत है।
- बिना लाइसेंस और सुविधाओं की कमी के आरोप भी नकारे
अस्पताल प्रबंधन ने बिना लाइसेंस संचालन, योग्य डॉक्टरों की कमी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया है। प्रबंधन के मुताबिक अस्पताल में आवश्यक अनुमतियां, प्रशिक्षित स्टाफ, विशेषज्ञ डॉक्टर और जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
इस मामले में परिजनों के गंभीर आरोपों और अस्पताल प्रबंधन की सफाई के आमने-सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। सविता जायसवाल की मौत का असल कारण क्या था और इलाज के दौरान कोई चूक हुई या नहीं, इसका खुलासा अब मेडिकल रिकॉर्ड्स, दस्तावेजों की जांच और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।
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