कोरबा, छत्तीसगढ़ Elephant Attack : जिले के वनांचल क्षेत्रों में हाथी और इंसान के बीच का संघर्ष लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। शनिवार को करतला वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़मार गांव में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां जंगल से निकलकर आबादी और खेतों तक पहुंचे जंगली हाथी ने एक ग्रामीण को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम और भारी दहशत का माहौल है।
Advt

खेत में काम करने के दौरान हुआ अचानक हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान जगेशर सिंह राठिया के रूप में हुई है। शनिवार की सुबह जगेशर सिंह अपने खेत में सामान्य रूप से कामकाज कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी वहां आ पहुंचा।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाथी के अचानक सामने आ जाने से जगेशर सिंह को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला। गुस्से में आए हाथी ने उन पर जोरदार हमला कर दिया और पैरों तले कुचल डाला। गंभीर रूप से चोटिल होने के कारण जगेशर सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
वन विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक सहायता
घटना की खबर फैलते ही बड़मार गांव और आसपास के इलाकों में कोहराम मच गया। ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।
-
मौके पर पहुंची टीम: घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम तुरंत हरकत में आई और दल-बल के साथ मौके पर पहुंची।
-
पोस्टमार्टम: वन विभाग और पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
-
मुआवजा प्रक्रिया: वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित परिवार को शासन के नियमों के तहत तत्काल सहायता राशि और मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हाथी-मानव द्वंद: कोरबा के वनांचल में गहराता संकट
कोरबा जिले के जंगलों से लगे गांवों में हाथियों की आवाजाही पिछले कुछ समय से लगातार बनी हुई है। कभी खेत में काम कर रहे किसान, कभी गांवों की सीमा में घुसकर तोड़फोड़, तो कभी रास्तों पर आमना-सामना होने की घटनाएं आम हो गई हैं। इस बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा खामियाजा वनांचल के गरीब ग्रामीणों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश और स्थायी सुरक्षा की मांग
घटना के बाद से ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर काफी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की तरफ से केवल ‘अलर्ट’ जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है, लेकिन ज़मीन पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
-
हाथियों की लोकेशन की सटीक निगरानी की जाए।
-
प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित रेस्क्यू दल तैनात किए जाएं।
-
जंगलों से लगे गांवों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आए दिन किसी हंसते-खेलते परिवार का चिराग न बुझे।








