रायपुर 25 जुलाई । छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के जरिए राज्य में पोषण, बाल विकास और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक रणनीति तैयार की है। इसी कड़ी में रायपुर के सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की एक उच्च-स्तरीय राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में उद्योगों की सामाजिक भागीदारी को बढ़ाना और आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण करना था।
बैठक के मुख्य बिंदु और अधिकारियों के विचार
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प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार के निर्देश: बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने उद्योगों से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा, “आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।”
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संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव का संबोधन: विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण और बाल स्वास्थ्य एवं पोषण—इन तीन प्रमुख स्तंभों पर काम कर रहा है। सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों, स्वच्छ पेयजल और खेल सामग्री का विकास किया जा सकता है।
इन प्रमुख क्षेत्रों में होगा सीएसआर का उपयोग
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कुपोषण उन्मूलन: राज्य से कुपोषण को दूर करने के लिए विशेष पोषण अभियान और निगरानी प्रणालियों को मजबूत करना।
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आंगनबाड़ी उन्नयन: केंद्रों का आधुनिकीकरण, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और बुनियादी ढांचे का विकास।
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पोषण वाटिका एवं पौधारोपण: स्थानीय स्तर पर पोषण सुरक्षा के लिए पोषण वाटिकाएं और मुनगा (सहजन) पौधारोपण को बढ़ावा देना।
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प्रारंभिक बाल विकास (Early Childhood Care): बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री और खेल गतिविधियां।
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किशोरियों का स्वास्थ्य: किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और कौशल विकास से जुड़े विशेष कार्यक्रम।
पोर्टल के माध्यम से बेहतर समन्वय
बैठक में यह जानकारी दी गई कि सीएसआर सहयोग को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ‘पंखुड़ी’ पोर्टल और राज्य शासन द्वारा ‘सर’ (State CSR) पोर्टल का संचालन किया जा रहा है। इन डिजिटल माध्यमों से औद्योगिक घरानों और विभागीय प्राथमिकताओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा रहा है।
आगामी समय में विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर चरणबद्ध तरीके से इन परियोजनाओं को जमीन पर उतारा जाएगा, जिससे जमीनी स्तर पर महिलाओं और बच्चों को सीधा लाभ मिल सकेगा।








