नई दिल्ली / कोरबा 23 जुलाई:
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आम नागरिकों और महिलाओं के साथ हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर कोरबा (छत्तीसगढ़) लोकसभा क्षेत्र की कांग्रेस सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस पूरी घटना को निंदनीय, शर्मनाक और लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ बताया है।
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सोशल मीडिया पर व्यक्त किया दर्द और गुस्सा
सांसद ज्योत्सना महंत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक और सख्त पोस्ट साझा करते हुए जंतर-मंतर पर घटी घटना की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों और सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में मौजूद अज्ञात लोगों ने आम नागरिकों और विशेष रूप से महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बर्बरता की।
“बेटियों के साथ अभद्रता करने के बाद पुलिसकर्मियों का इस तरह हंसना उनकी चरम संवेदनहीनता को दर्शाता है। लोकतंत्र में इस तरह की तानाशाही और दमनकारी रवैये का कोई स्थान नहीं हो सकता।”
— श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत (सांसद, कोरबा)
गृहमंत्री अमित शाह को पत्र: निलंबन और पहचान की मांग
घटना की गंभीरता को देखते हुए सांसद ज्योत्सना महंत ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर त्वरित और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में उन्होंने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
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त्वरित पहचान: सिविल ड्रेस में गुंडागर्दी और प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की करने वाले अज्ञात लोगों की पहचान उजागर की जाए।
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कड़ी कार्रवाई: महिलाओं पर हाथ उठाने वाले और अभद्रता करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को तुरंत निलंबित किया जाए।
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जवाबदेही तय हो: शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जाए और पुलिस की संवेदनहीनता पर जवाबदेही तय की जाए।
“लोकतंत्र में तानाशाही स्वीकार्य नहीं”
सांसद महंत ने कहा कि देश में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जिस तरह से सुरक्षा बलों और अज्ञात तत्वों द्वारा महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई, उसने कानून-व्यवस्था और प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठा जाएगा और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाएंगी।









