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‘मुसलमानों के बिना हिंदुत्व अधूरा’ और सर सैयद की तारीफ: RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर AMU इतिहासकार की प्रतिक्रिया

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मोहन भागवत का बयान: “मुसलमानों को हटा दें, तो हिंदुत्व भी खत्म”

नेशनल न्यूज डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल  ही में एक कार्यक्रम के दौरान भारत में विविधता और समावेशिता पर जोर देते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “अगर हिंदुस्तान से मुसलमानों को हटा दिया जाए, तो हिंदुत्व भी खत्म हो जाएगा।” भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व का मूल स्वभाव ही सबको साथ लेकर चलना है, और इसके अस्तित्व के लिए सभी समुदायों का साथ होना अनिवार्य है।

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इसी दौरान उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान का जिक्र करते हुए एक ऐतिहासिक घटना का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि एक समय लाहौर में आर्य समाज ने सर सैयद अहमद खान का भव्य स्वागत और सम्मान किया था। भागवत के मुताबिक, उस दौर में सर सैयद का स्वागत इस बात के लिए किया गया था कि वे मुस्लिम समाज के एक बेहद प्रगतिशील और प्रमुख बैरिस्टर थे, जिन्होंने समाज सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए थे।

AMU के वरिष्ठ इतिहासकार राहत अबरार ने किया स्वागत

मोहन भागवत के इस बयान का अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के वरिष्ठ इतिहासकार और पूर्व जनसंपर्क अधिकारी (PRO) राहत अबरार ने खुलकर स्वागत किया है। राहत अबरार ने कहा कि देश के इतने बड़े संगठन के प्रमुख द्वारा सर सैयद अहमद खान की तारीफ करना एक बेहद सकारात्मक और अच्छी बात है।

अबरार ने सर सैयद के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा:

“सर सैयद अहमद खान ने देश में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक काम किया था। उनके द्वारा शुरू किए गए ‘अलीगढ़ आंदोलन’ (Aligarh Movement) और शिक्षा सुधारों का असर आज भी देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और समाज में साफ देखा जा सकता है।”

“कांग्रेसी नहीं थे सर सैयद अहमद खान”

बयान के ऐतिहासिक संदर्भों पर बात करते हुए राहत अबरार ने एक और महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर सैयद अहमद खान कांग्रेस की विचारधारा को पसंद नहीं करते थे। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की स्थापना के समय कुछ विचार उनके सुधारवादी आंदोलनों से प्रभावित जरूर थे, लेकिन सर सैयद ने खुद को और मुस्लिम समुदाय को उस समय कांग्रेस की राजनीति से पूरी तरह दूर रखा था। उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ शिक्षा और सामाजिक सुधार पर केंद्रित था।

कौन थे सर सैयद अहमद खान?

  • परिचय: सर सैयद अहमद खान 19वीं सदी के भारत के एक महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक और विचारक थे।

  • AMU की स्थापना: उन्होंने मुस्लिम समाज में आधुनिक और वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1875 में ‘मदरसतुल उलूम’ की स्थापना की, जो बाद में MAO (मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल) कॉलेज बना। यही संस्थान 1920 में ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय’ (AMU) के रूप में तब्दील हुआ।

  • विचारधारा: वे हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक थे और उन्होंने भारत को एक ‘सुंदर दुल्हन’ की तरह बताया था, जिसकी दो आंखें हिंदू और मुसलमान हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मोहन भागवत का यह बयान और उस पर AMU के बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जहां कुछ लोग इसे आरएसएस के समावेशी रुख और इतिहास को स्वीकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। बहरहाल, सर सैयद अहमद खान के योगदान पर दक्षिणपंथी और प्रगतिशील विचारकों के बीच बनी यह सहमति चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

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