रायपुर, 17 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में कुदरत का अनमोल उपहार ‘तेंदूपत्ता’ और ‘बांस’ आज केवल वनोपज नहीं, बल्कि ग्रामीणों की तकदीर बदलने वाला ‘हरा सोना’ साबित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा करने के क्रांतिकारी फैसले ने लाखों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संबल दिया है। विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
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इसी कड़ी में, राज्य के वनांचल बहुल मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से बेहद उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं, जहां चालू सीजन में हजारों परिवारों के चेहरों पर इस ‘हरे सोने’ ने बिखेरी है मुस्कान।
आंकड़ों की जुबानी: 37 हजार से अधिक परिवारों को मिला ₹30.65 करोड़ का भुगतान
वर्ष 2026 में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य बेहद सुचारू और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। इस अभियान के तहत जिले की 39 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के अंतर्गत 40 लॉट और 502 फड़ों के माध्यम से काम किया गया।
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सफलता के आंकड़े (मई 2026):
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लाभान्वित संग्राहक परिवार: 37,131
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कुल संग्रहित तेंदूपत्ता: 55,741.7 मानक बोरा
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कुल भुगतान राशि: ₹30,65,79,350 (30 करोड़ 65 लाख 79 हजार 350 रुपये)
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बूटा कटाई का अतिरिक्त भुगतान (फरवरी-मार्च 2026): ₹40,51,154
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संग्रहण से होने वाली इस आय का उपयोग ग्रामीण परिवार अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य, दैनिक घरेलू जरूरतों और खेती-किसानी के लिए नए उपकरण व खाद-बीज खरीदने में कर रहे हैं।
उत्कृष्ट गुणवत्ता ने दिलाई देश भर में पहचान
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के जंगलों से मिलने वाले तेंदूपत्ते की गुणवत्ता बेहद शानदार और बेजोड़ मानी जाती है। यही वजह है कि बाजार में इस जिले के तेंदूपत्ता लॉट की मांग हमेशा बनी रहती है और ठेकेदार इसके लिए अच्छी बोलियां लगाते हैं।
बोनस की तैयारी: ग्रामीणों की इस मेहनत को सराहते हुए वर्ष 2023 के तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जिले की 36 समितियों के 33 हजार 363 संग्राहक परिवारों को ₹11,97,98,934 (11 करोड़ 97 लाख 98 हजार 934 रुपये) की बोनस राशि वितरित करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
DBT से सीधे खाते में पहुंची रकम, बढ़ी पारदर्शिता
शासन की नीतियों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अब ग्रामीणों को अपने हक के पैसे के लिए भटकना नहीं पड़ता।
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डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): तेंदूपत्ता संग्रहण और बूटा कटाई की पूरी राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है।
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पारदर्शिता और त्वरित भुगतान: इस ऑनलाइन व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है और ग्रामीणों को समय पर पूरा भुगतान मिल रहा है, जिससे शासन के प्रति उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।
महिला सशक्तिकरण का नया मॉडल
इस पूरे अभियान का सबसे खूबसूरत पहलू महिलाओं की भागीदारी है। घर के चूल्हे-चौके से निकलकर वनों की ओर कदम बढ़ाने वाली ये महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की रीढ़ बन रही हैं, बल्कि खुद को आर्थिक रूप से स्वतंत्र भी कर रही हैं। गाँव में ही सम्मानजनक रोजगार मिलने से पलायन पर पूरी तरह रोक लगी है और ग्रामीण महिलाएं आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर हैं।








