मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड और पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ (पूर्व नाम: घल्लूघारा / पंजाब ’95) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने के महज 48 घंटे के भीतर ही इस फिल्म को भारतीय दर्शकों के लिए ब्लॉक कर दिया गया है।
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3 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म को 5 जुलाई को प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। ZEE5 ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है कि फिल्म अब भारतीय कैटलॉग में उपलब्ध नहीं है, हालांकि इसे हटाने के पीछे के ठोस कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए ZEE5 Global पर अभी भी स्ट्रीम हो रही है।
CBFC के 127 कट्स और 3 बार नाम बदलने की इनसाइड स्टोरी
यह फिल्म सिर्फ रिलीज के बाद ही नहीं, बल्कि बनने के समय से ही भारी विवादों में घिरी रही है। आइए जानते हैं इसके पीछे की मुख्य वजहें:
1. थिएटर रिलीज से ओटीटी तक का संघर्ष
शुरुआत में मेकर्स इस फिल्म को सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर रिलीज करना चाहते थे। लेकिन ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ (CBFC) के साथ इसकी कानूनी और वैचारिक लड़ाई सालों तक चली। सेंसर बोर्ड ने फिल्म की संवेदनशीलता को देखते हुए इसमें 127 कट्स लगाने का निर्देश दिया था। इन बदलावों के कारण फिल्म की रिलीज बार-बार टलती रही और आखिरकार मेकर्स को थिएटर रिलीज का विचार छोड़कर ओटीटी का रुख करना पड़ा।
2. तीन बार बदला गया फिल्म का नाम
सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण फिल्म को अपना नाम तक बदलना पड़ा:
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पहला नाम: शुरुआत में इसका नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था (जो सिख इतिहास के एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक नरसंहार को दर्शाता है)।
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दूसरा नाम: CBFC के कड़े रुख के बाद इसे बदलकर ‘Punjab ’95’ किया गया।
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तीसरा नाम: डिजिटल रिलीज से ठीक पहले विवादों से बचने के लिए इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ किया गया। निर्देशक हनी त्रेहन के मुताबिक, उन्हें ओरिजिनल टाइटल इस्तेमाल करने की इजाजत ही नहीं मिली।
दिलजीत दोसांझ की भविष्यवाणी सच साबित हुई!
फिल्म के अचानक हटाए जाने से प्रशंसक हैरान जरूर हैं, लेकिन फिल्म के मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ को इसका अंदेशा पहले से था।
“मुझे लगता है कि यह फिल्म भारत में ज्यादा दिनों तक उपलब्ध नहीं रह पाएगी। इसलिए जितने भी फैंस हैं, वे इसे जल्द से जल्द डाउनलोड करके देख लें।” — दिलजीत दोसांझ (इंस्टाग्राम लाइव के दौरान)
दिलजीत का यह पुराना बयान अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। फैंस हैरान हैं कि दिलजीत की कही बात इतनी जल्दी सच साबित हो जाएगी।
‘मानवीय संघर्ष की कहानी’: क्या बोले निर्देशक?
फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहन ने इस पूरे विवाद और फिल्म के विषय पर बात करते हुए कहा कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा:
“मेरी कोशिश शुरू से ही इस कहानी को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ दर्शकों के सामने रखने की थी। यह फिल्म केवल किसी एक व्यक्ति विशेष की कहानी नहीं है, बल्कि विपरीत और कठिन परिस्थितियों में इंसानी हिम्मत, जज्बे और संघर्ष को समर्पित एक सिनेमाई कोशिश है।”
फिलहाल भारत में इस फिल्म के हटने से सोशल मीडिया पर ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ और ‘सेंसरशिप’ को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। भारतीय दर्शक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या यह फिल्म कभी भारत में दोबारा कानूनी रूप से देखने को मिलेगी या नहीं।








