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20 हजार लीटर पानी और 10 दिन का सफर: कानपुर का ‘सतीश’ बनेगा इंदौर का मेहमान, बदले में आएगी शेरनी

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कानपुर/इंदौर 2 जुलाई : कानपुर और इंदौर के चिड़ियाघरों के बीच एक बेहद अनोखा और दिलचस्प ‘एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम’ होने जा रहा है। इस अनोखे सौदे के तहत कानपुर जू को जहां अपने शेरों का कुनबा बढ़ाने के लिए एक नई शेरनी मिलने जा रही है, वहीं बदले में इंदौर चिड़ियाघर को कानपुर का मशहूर दरियाई घोड़ा (हिप्पो) ‘सतीश’ दिया जाएगा। इस शिफ्टिंग की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सतीश की 700 किलोमीटर की इस यात्रा को सुरक्षित पूरा करने के लिए रास्ते में लगभग 20,000 लीटर पानी खर्च किया जाएगा।

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पानी क्यों है सतीश के लिए ‘लाइफलाइन’?

दरअसल, दरियाई घोड़े की शारीरिक संरचना ऐसी होती है कि वह अपने जीवन का करीब 80% हिस्सा पानी के भीतर ही बिताता है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) धूप और हवा के सीधे संपर्क में आने से उसकी त्वचा फटने लगती है, जिससे वह गंभीर रूप से बीमार हो सकता है।

नेशनल जू अथॉरिटी के कड़े नियमों के मुताबिक, वन्यजीवों को ले जाने वाले वाहन की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे से अधिक नहीं हो सकती। कछुआ गति और रास्ते के पड़ावों को देखते हुए सतीश को इंदौर पहुंचने में करीब 10 दिन का समय लगेगा। इतने लंबे समय तक हिप्पो को पानी से दूर रखना जानलेवा हो सकता है, इसलिए वन विभाग ने एक हाईटेक ‘हाइड्रेशन प्लान’ तैयार किया है।

पिंजरे के ऊपर फिट होंगे वॉटर ड्रम

इस सफर को सुरक्षित बनाने के लिए इंदौर चिड़ियाघर प्रशासन एक खास तरह का पिंजरा तैयार कर रहा है।

  • पिंजरे की छत पर 100-100 लीटर की क्षमता वाले दो बड़े पानी के ड्रम फिट किए जाएंगे।

  • इन ड्रमों से सफर के दौरान लगातार सतीश के शरीर पर पानी का छिड़काव (शावर) होता रहेगा।

  • इससे हिप्पो की त्वचा में नमी बनी रहेगी और उसे डिहाइड्रेशन या गर्मी का खतरा नहीं होगा।

हाईवे के ढाबों पर बनेगा ‘स्पा सेंटर’ सतीश के रूट पर केवल उन्हीं हाईवे ढाबों को शॉर्टलिस्ट किया जा रहा है, जहां चौबीसों घंटे चालू हालत में गहरे ट्यूबवेल और पानी की उत्तम व्यवस्था हो। गाड़ी रुकते ही पाइप के जरिए पूरे प्रेशर के साथ सतीश को नहलाया जाएगा। 10 दिनों की इस यात्रा में ड्रम रिफिलिंग और स्पा में कुल 20 हजार लीटर पानी खर्च होने का अनुमान है।

एक्सचेंज ऑफर फाइनल, तारीखों का इंतजार

कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, उनके यहाँ शेरों की संख्या तो पर्याप्त है, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) लेकिन शेरनियों की कमी के कारण उनका कुनबा नहीं बढ़ पा रहा था। इस कमी को इंदौर की शेरनी पूरा करेगी। दोनों चिड़ियाघरों के बीच कागजी कार्रवाई और प्लान फाइनल हो चुका है, अब बस सतीश की इस ‘शाही यात्रा’ की तारीखों का एलान होना बाकी है।

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