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स्कूल में ‘मंत्र’ पर छिड़ा महासंग्राम! छत्तीसगढ़ में नया नियम बनते ही गरमाई सियासत

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अंबिकापुर 17 जून : छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही शिक्षा विभाग के एक नए आदेश ने राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के दौरान गायत्री मंत्र का उच्चारण अनिवार्य कर दिया है। बस, फिर क्या था? इस आदेश के आते ही विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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‘संविधान की भावना के खिलाफ’: पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का करारा हमला

इस पूरे मामले पर राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:

  • थोप नहीं सकते आस्था: किसी भी धार्मिक मंत्र का उच्चारण व्यक्ति की अपनी मर्ज़ी और आस्था का विषय है। इसे किसी पर ज़बरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता।

  • संविधान का उल्लंघन: सिंहदेव ने इस फैसले को संविधान की मूल भावना और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत बताया है।

  • मिले छूट: उन्होंने मांग की है कि जो बच्चे या लोग इसमें शामिल नहीं होना चाहते, उन्हें इससे अलग रहने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए।

अल्पसंख्यक संगठनों की दो टूक: ‘यह देश धर्मनिरपेक्ष है’

कांग्रेस के साथ-साथ कई अल्पसंख्यक संगठनों ने भी इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठनों का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है और सरकारी स्कूलों में किसी एक धार्मिक व्यवस्था को अनिवार्य करना देश के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

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