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PoK में बवाल: JAAC पर बैन के बाद भड़की हिंसा, 11 की मौत; इंटरनेट बंद और ट्रैवल एडवाइजरी जारी

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मुजफ्फराबाद 9 जून : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थिति बेहद गंभीर और तनावपूर्ण हो गई है। सरकार द्वारा नागरिक अधिकार समूह ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित किए जाने के बाद पूरा क्षेत्र सुलग उठा है। इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है और 70 से अधिक लोग घायल हैं। मृतकों में सुरक्षाकर्मी और प्रदर्शनकारी दोनों शामिल हैं।

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ताजा हिंसा तब भड़की जब सुरक्षा बलों ने एक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर जमा प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। इसके बाद हुई फायरिंग ने स्थिति को बेकाबू कर दिया। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं और धारा 144 लागू कर दी है।

क्यों गुस्से में हैं लोग? (प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें)

स्थानीय जनता और प्रदर्शनकारियों के इस उग्र आंदोलन के पीछे कई बड़े राजनीतिक और आर्थिक कारण हैं:

  • सीटों के आरक्षण का विरोध: प्रशासन ने 45 सदस्यीय विधानसभा में से 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है, जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे उनकी अपनी राजनीतिक ताकत और आवाज कमजोर हो जाएगी।

  • आर्थिक बदहाली और महंगाई: पिछले दो साल से क्षेत्र की जनता बिजली की भारी कटौती, आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। लोगों का आरोप है कि सरकार इन समस्याओं को हल करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

  • दमनकारी नीतियां: लोग JAAC पर से प्रतिबंध हटाने, इंटरनेट बहाल करने और आंदोलन के दौरान मारे गए अपने नेताओं के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि एक नागरिक समूह (JAAC) पर आतंकी कानून के तहत बैन लगाना गलत है और नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का हक होना चाहिए। हालात की समीक्षा के लिए आयोग जल्द ही एक ‘फैक्ट-फाइंडिंग टीम’ भेजने की तैयारी में है।

आगे क्या? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल

आगामी 27 जुलाई को होने वाले चुनावों को देखते हुए पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, JAAC के नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे सरकारी दमन के आगे झुकेंगे नहीं और आंदोलन जारी रहेगा।

PoK के बिगड़ते हालात का असर अब वैश्विक स्तर पर भी दिख रहा है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने स्थिति को भांपते हुए अपने नागरिकों के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी कर दी है और उन्हें इस क्षेत्र में न जाने की सलाह दी है।

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