▪️ “मेरे लिए कर्मचारी नहीं, परिवार थे वे 25 साथी…” पुत्र शोक के बीच छलका वेदांता चेयरमैन का दर्द
कोरबा 27 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले के सिंघीतराई (एथेना) पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे पर वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी गहरी संवेदना और हैरानी व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक संदेश में उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में से एक बताया है।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
Advt

विशेषज्ञता पर उठे सवाल: ‘महारत्न’ के प्रबंधन में चूक कैसे?
अनिल अग्रवाल ने हादसे की तकनीकी जवाबदेही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्लांट के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी देश की प्रतिष्ठित महारत्न कंपनी NTPC-GE (NGSL) के पास थी। उन्होंने एक सटीक उदाहरण देते हुए पूछा:
“यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई मालिक अपनी गाड़ी किसी बेहद अनुभवी और लाइसेंस प्राप्त ड्राइवर को सौंपकर निश्चिंत हो जाता है कि सफर सुरक्षित रहेगा। हमने भी विशेषज्ञता पर भरोसा किया था, लेकिन इसके बावजूद इतना बड़ा हादसा होना चौंकाने वाला और हृदयविदारक है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि वेदांता के लिए सुरक्षा हमेशा शीर्ष प्राथमिकता रही है और विशेषज्ञों की मौजूदगी में ऐसी अनहोनी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
पुत्र शोक और 25 साथियों की विदाई का दोहरा दुख
चेयरमैन का यह संदेश तब आया है जब वे स्वयं एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति से गुजर रहे हैं। साल की शुरुआत में अपने पुत्र अग्निवेश को खोने के गम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, इसे वे भली-भांति समझते हैं। उनके लिए ये 25 कर्मी केवल कर्मचारी नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा थे। 14 अप्रैल की उस काली तारीख ने उनके व्यक्तिगत घावों को फिर से हरा कर दिया है।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
मुआवजा वितरण और भविष्य की सुरक्षा का संकल्प
अनिल अग्रवाल ने जानकारी दी कि प्रशासन के सहयोग से सभी पीड़ित परिवारों को मुआवजा राशि वितरित कर दी गई है। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सहायता की प्रक्रिया यहीं न रुके, बल्कि प्रभावित परिवारों का आगे भी ख्याल रखा जाए। भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए समूह के सभी प्लांटों में कड़ा सुरक्षा ऑडिट और नए सुरक्षा मानक लागू किए जा रहे हैं।
अनिल अग्रवाल का यह बयान न केवल एक चेयरमैन की जवाबदेही तय करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बड़े औद्योगिक समूहों में मानवीय संवेदनाओं का स्थान सर्वोपरि है। जहाँ एक ओर जांच जारी है, वहीं चेयरमैन के इस सीधे संवाद ने शोक संतप्त परिवारों को संबल देने का प्रयास किया है।
।।।








