बिलासपुर 19 अप्रैल । फिल्म ‘गजनी’ में तो आमिर खान को हर 15 मिनट में चीजें भूलने की बीमारी थी, लेकिन बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने तो इस मामले में हॉलीवुड को भी पीछे छोड़ दिया है। यहाँ फाइलें दराज में नहीं, बल्कि ‘याददाश्त के अंधेरे’ में खो जाती हैं। तिफरा के तरुण साहू पिछले एक साल से दफ्तर के चक्कर लगा-लगाकर थक गए थे, लेकिन अधिकारियों का जवाब हर बार वही था— “फाइल कहाँ है? हमें याद नहीं।” आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
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जब ‘आमिर खान’ बने पीड़ित युवक ने निकाला तोड़
तरुण साहू ने जब देखा कि सिस्टम “शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस” का शिकार हो चुका है, तो उन्होंने ठान लिया कि अब इलाज कानूनी नहीं, बल्कि ‘घरेलू’ होगा। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) वे सीधे हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर पहुँचे, जेब से बादाम की थैली निकाली और मैडम की मेज पर बादामों की नुमाइश लगा दी।
मेज पर बादाम बिखेरते हुए युवक का अंदाज बिल्कुल वैसा ही था, जैसे कोई डॉक्टर किसी मरीज को दवा की खुराक देता है। युवक ने कहा— “मैडम, ये बादाम चबाइए, शायद दिमाग की नसें खुलें और मेरी खोई हुई फाइल वापस मिल जाए!”
सिस्टम का ‘बादामी’ टेस्ट
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मुद्दा: रिसेल में खरीदे गए EWS फ्लैट का नामांतरण।
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लापरवाही: एक साल से फाइल ‘लापता’, कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से ‘तौबा’ कर चुके थे।
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अनोखा विरोध: न नारेबाजी, न पुतला दहन; बस ‘अक्ल की खुराक’ का वितरण।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘प्रसाद’
युवक ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया है, जो अब इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है। लोग कह रहे हैं कि सरकारी दफ्तरों में अब रिश्वत नहीं, बल्कि बादाम, च्यवनप्राश और शंखपुष्पी लेकर जाना चाहिए ताकि अधिकारियों को अपनी ड्यूटी याद रहे।
अब सवाल यह है कि क्या इन बादामों का असर होगा? या फिर अगले हफ्ते युवक को अखरोट लेकर पहुँचना पड़ेगा? फिलहाल तो हाउसिंग बोर्ड के गलियारों में सन्नाटा है और मेज पर पड़े बादाम अधिकारियों की कार्यप्रणाली को मुँह चिढ़ा रहे हैं।
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