सक्ती 8 जून । छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के डभरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। बीते 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर हादसे के बाद, अब प्लांट के बाहर ठेका श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। श्रमिकों का आरोप है कि प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के 200 से अधिक कर्मचारियों को काम से निकाल दिया है।
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बिना लिखित आदेश के आजीविका पर संकट
धरना दे रहे श्रमिकों के अनुसार, एनजीएसएल (NGSL) कंपनी के माध्यम से प्लांट में करीब 400 ठेका कर्मचारी कार्यरत थे। 14 अप्रैल के हादसे में 25 श्रमिकों की मौत के बाद से प्लांट में उत्पादन और रखरखाव का काम ठप पड़ा है। इसका खामियाजा भुगत रहे करीब 200 से अधिक श्रमिकों को प्रबंधन ने मौखिक रूप से काम से अलग कर दिया है।
श्रमिकों का कहना है कि उन्हें न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया और न ही वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की गई, जिससे उनके सामने अचानक आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसके विरोध में लगभग 70 श्रमिकों ने प्लांट के गेट नंबर-1 पर एकत्रित होकर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आंदोलनकारी श्रमिकों की प्रमुख मांगें
श्रमिकों ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रबंधन उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेता, आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
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पुनः रोजगार: प्रभावित सभी श्रमिकों को वापस काम पर लिया जाए या नई एजेंसी में समायोजित (Adjust) किया जाए।
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वेतन और मुआवजा: मई और जून महीने का पूरा वेतन दिया जाए, साथ ही अतिरिक्त तीन महीने का मुआवजा मिले।
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दस्तावेज: सभी श्रमिकों को कार्य अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) और एनओसी (NOC) जारी की जाए।
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लंबित भुगतान: पीएफ (PF), ईएसआईसी (ESIC) और बोनस सहित अन्य सभी लंबित देयों का तुरंत भुगतान हो।
श्रमिकों की चेतावनी: “अगर प्रबंधन ने हमारी जायज मांगें पूरी नहीं कीं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।”
क्षेत्र में गरमाया माहौल
14 अप्रैल को हुए उस भीषण हादसे के बाद से ही वेदांता पावर प्लांट की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब इतनी बड़ी संख्या में स्थानीय और ठेका श्रमिकों का रोजगार छीने जाने के बाद यह आंदोलन पूरे क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है।








