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फीफा वर्ल्ड कप 2026: तमाम भू-राजनीतिक तनावों और वीजा अड़चनों को पछाड़ मेक्सिको पहुंची ईरानी फुटबॉल टीम

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नई दिल्ली/तिजुआना, 8 जून 2026:

वैश्विक स्तर पर जारी जबरदस्त तनाव और अमेरिका-इजराइल के साथ जारी तनातनी के बीच ईरान की फुटबॉल टीम ने इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा दिया है। तमाम राजनीतिक अड़चनों और वीजा विवादों को धता बताते हुए ईरानी टीम आखिरकार फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेने के लिए रविवार, 7 जून की दोपहर मेक्सिको के तिजुआना शहर पहुंच गई।

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गौरतलब है कि फुटबॉल के इस महाकुंभ की शुरुआत आगामी 11 जून से होने जा रही है, जिसका संयुक्त आयोजन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको द्वारा किया जा रहा है। तुर्की के अंताल्या में कड़े अभ्यास सत्र के बाद ईरानी टीम शनिवार को फ्लाइट से रवाना हुई थी।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी: ‘हाए मेक्सिको!’

मेक्सिको की धरती पर कदम रखते ही ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने सोशल मीडिया के जरिए फैंस के साथ अपनी खुशी साझा की। टीम के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से खिलाड़ियों की तस्वीरें पोस्ट की गईं, जिसके कैप्शन में लिखा था— “हाए मेक्सिको” (¡Hola México!)

यह तस्वीरें उन कयासों और आशंकाओं पर पूर्णविराम लगाती हैं, जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान इस बार विश्व कप का हिस्सा नहीं बन पाएगा।

क्यों लग रहा था कि ईरान नहीं खेलेगा वर्ल्ड कप?

कुछ महीनों पहले तक ईरान के टूर्नामेंट में शामिल होने पर काले बादल मंडरा रहे थे। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण थे:

  • अमेरिका-इजराइल के साथ सैन्य टकराव: फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद दोनों पक्षों में तनाव चरम पर था।

  • डोनाल्ड ट्रंप का बयान: खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सार्वजनिक रूप से कहा था कि ईरान की टीम को फीफा वर्ल्ड कप में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

ईरान फुटबॉल एसोसिएशन का कड़ा रुख

अमेरिका के इस आक्रामक रवैये पर ईरान फुटबॉल एसोसिएशन (FFIRI) ने कड़ी नाराजगी जताई थी। ईरान ने फीफा के मंच पर अपना पक्ष रखते हुए साफ कहा:

“वर्ल्ड कप जैसा प्रतिष्ठित टूर्नामेंट फीफा (FIFA) का है, न कि अमेरिका या इजराइल की जागीर। खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।”

ईरान फुटबॉल एसोसिएशन कई दिनों तक अपनी इस बात पर अडिग रहा, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

वीजा रिजेक्शन: अमेरिका ने ऐसे खड़ी की मुश्किलें

भले ही ईरान टूर्नामेंट में शामिल होने में कामयाब रहा, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने अपनी नीतियों से टीम के लिए भारी मुश्किलें खड़ी कीं।

पहले ईरानी टीम को अमेरिका के एरिजोना में अपना प्री-वर्ल्ड कप कैंप लगाना था, लेकिन पाबंदियों के कारण उन्हें यह प्लान रद्द करना पड़ा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया था कि खिलाड़ियों का स्वागत है, लेकिन टीम के साथ आने वाले सैन्य पृष्ठभूमि या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े लोगों को वीजा नहीं दिया जाएगा।

इनके वीजा हुए रिजेक्ट:

इसी नीति के तहत अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष और पूर्व IRGC कमांडर मेहदी ताज समेत टीम के करीब 12 कोच, मेडिकल स्टाफ और ट्रेनर्स के वीजा रिजेक्ट कर दिए। इस कदम से ईरान का पूरा ट्रेनिंग शेड्यूल अधर में लटक गया था।

संकटमोचक बना मेक्सिको: राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने बढ़ाया हाथ

जब अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरान का अभ्यास सत्र पूरी तरह प्रभावित हो गया, तब सह-मेजबान मेक्सिको ईरान के लिए संकटमोचक बनकर सामने आया।

  • मई 2026 में मिला न्योता: मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने अद्वितीय खेल भावना और मानवता का परिचय देते हुए मई के महीने में ईरानी टीम को अपने देश में कैंप लगाने का खुला न्योता दिया।

  • तैयारियों को मिला अंतिम रूप: मेक्सिको की इस बड़ी कूटनीतिक और मानवीय मदद के कारण ही ईरानी टीम तुर्की के रास्ते होते हुए मेक्सिको पहुंच सकी और अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे पाई।

अब देखना दिलचस्प होगा कि इतनी चुनौतियों और मानसिक दबाव से गुजरने के बाद मैदान पर ईरानी टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है।

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