रायपुर छत्तीसगढ़ 18 अप्रैल 2026 । छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुई दुर्घटना को लेकर कांग्रेस ने तीखे सवाल किए हैं। साथ ही सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने शुक्रवार को संयुक्त पत्रकारवार्ता लेकर घटना के लिए सीधे तौर पर उद्योग विभाग और प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही हाईकोर्ट के वरिष्ठतम रिटायर्ड जज से पूरे मामले की जांच की मांग की है।
बैज ने कहा कि इस दुर्घटना में सरकार की भी लापरवाही है। उन्होंने पूछा है कि दुर्घटना के पहल पहले नियमित जांच की गई थी। जब एक वायलर की सफाई की जाती है तो दूसरे किलेन या वायलर को बंद रखा जाना चाहिए, यहां पर उस मानक का पालन नहीं किया गया। प्रदेश में लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाएं चिंता का विषय है। यह सुरक्षा मानकों के प्रति बरती जा रही घोर लापरवाही है। ऐसी घटना केवल दुर्घटना नहीं हत्या है, सदोष मानव वध है। राज्य में पिछले ढाई सालों में औद्योगिक दुर्घटना में लगभग 300 श्रमिकों की जान गई है।
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सदोष मानव वध की धारा लगाएं
नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा कि भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। 20 से अधिक लोग मरे हैं, दोषी पर केवल जमानतीय धारा लगाई गई है। हमारी मांग है सदोष मानव वध की धारा लगाई जाए। घटना में हम सरकार की जांच की घोषणा से संतुष्ठ नहीं है। इतनी बड़ी घटना की जांच एसडीएम कर रहे हैं। हम मांग करते है हाईकोर्ट के सीटिंग जज से जांच कराई जाए। पहले भी इसी वेदांता समूह के बॉलको में 40 लोगों की मौत हुई, यहां भी 20 लोगों की मौत हुई है, यह प्रबंधन की लापरवाही है। ज्यादा मुनाफा कमाने प्रबंधन ने चीनी सामान का तथा विदेशों के कबाड़ लाकर फैक्ट्री बनाया। गलत तथा खराब मशीनरी के उपयोग के कारण दुर्घटना हुई है।
सरकार की “कमजोर” कार्रवाई पर नाराजगी
कांग्रेस ने पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं को लेकर सरकार को घेरा है। वर्तमान में पुलिस ने निम्नलिखित जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया है:

सभी धाराएं जमानती
* धारा 106 (1): उपेक्षापूर्वक कार्य करना।
सुरक्षा नियमों का पालन न करना, जिससे बॉयलर फटने जैसी स्थिति बनी और श्रमिकों की जान गई।
* धारा 289: उतावलेपन या लापरवाही से किया
गया ऐसा कार्य जिससे मानव जीवन या किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए।
* धारा 3 (5): सामूहिक उत्तरदायित्व; जब एक से अधिक लोग मिलकर उपेक्षापूर्वक कार्य करते हैं, तो वे सभी समान रूप से दोषी माने जाते हैं।
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