Sunday Coincidence : भारतीय संगीत के इतिहास में ऐसा संयोग न कभी सुना गया, न कभी देखा गया। इसे कुदरत का कोई रहस्य कहें या दो बहनों का अटूट प्रेम, लेकिन सच यही है कि सुरों की दुनिया की दूसरी बड़ी स्तंभ, आशा भोसले भी उसी मोड़ पर आकर ठहर गईं, जहाँ उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने दुनिया को विदा कहा था।

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अंकों का अद्भुत और दुखद खेल
दुनिया इसे केवल संयोग नहीं मान पा रही है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं:
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उम्र का पड़ाव: सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का निधन 92 वर्ष की आयु में हुआ था। आज आशा भोसले ने भी 92 वर्ष की उम्र में ही अंतिम सांस ली।
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दिन का साथ: लता दीदी का निधन रविवार (6 फरवरी, 2022) को हुआ था। नियति देखिए कि आशा ताई के महाप्रयाण के लिए भी रविवार का ही दिन चुना गया।
संगीत के एक हिमालय का अंत
लता और आशा—ये महज दो नाम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के दो फेफड़े थे। यदि लता जी की आवाज़ में मंदिर की शांति और पवित्रता थी, तो आशा जी की आवाज़ में जीवन का उल्लास और ऊर्जा थी। 1940 के दशक से शुरू हुआ यह सफर आज 2026 में आकर एक ऐसे मुकाम पर रुक गया है, जहाँ से अब केवल यादें शेष हैं।
बड़ी बहन की राह पर छोटी बहन
मंगेशकर परिवार के करीबी बताते हैं कि लता दीदी के जाने के बाद आशा ताई अक्सर भावुक हो जाया करती थीं। उन्होंने कई बार कहा था कि दीदी के बिना संगीत अधूरा है। आज रविवार के दिन, उसी 92 वर्ष की उम्र में विदा लेकर उन्होंने जैसे यह साबित कर दिया कि दोनों बहनों की आत्माएं एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी थीं।
“भारतीय सिनेमा के पार्श्व संगीत (Playback Singing) का जो स्वर्ण युग 80 साल पहले शुरू हुआ था, आज उसका अंतिम चिराग भी बुझ गया। यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की सांस्कृतिक क्षति है।”








