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आपकी आलमारी में छिपी है छत्तीसगढ़ की पहचान! पांडुलिपियों को सहेजने के लिए CM साय ने मांगा जन-सहयोग

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  CM Sai Appeals रायपुर | 12 अप्रैल 2026छत्तीसगढ़ की माटी में दबा प्राचीन ज्ञान और पूर्वजों की बौद्धिक विरासत अब दुनिया के सामने आने को तैयार है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के नागरिकों से एक भावुक अपील करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा को बचाने के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

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पांडुलिपियां: हमारी सभ्यता का जीवंत प्रमाण

मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों, मंदिरों या पुराने बस्तों में रखी पांडुलिपियाँ केवल कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और ज्ञान-वैभव का जीवंत दस्तावेज हैं। इन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार का ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़ में अभियान की बड़ी सफलता

राज्य में यह अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिसके कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • लक्ष्य से आगे: शुरुआत में केवल 148 पांडुलिपियों की जानकारी मिली थी, लेकिन अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे पूरा किया जा चुका है।

  • प्रशासनिक मुस्तैदी: प्रदेश के 33 में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समितियां गठित हो चुकी हैं और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है।

  • डिजिटल सुरक्षा: चिन्हित की गई पांडुलिपियों को डिजिटल माध्यम से हमेशा के लिए सुरक्षित किया जा रहा है।

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आप कैसे बन सकते हैं इस मिशन का हिस्सा?

मुख्यमंत्री ने अपील की है कि यदि आपके पास कोई भी प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र उपलब्ध है, तो उसे छिपाकर न रखें। आप ‘ज्ञानभारतम’ (Gyanbharatam) मोबाइल एप पर उसका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय गौरव के अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।

“नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को अमर बनाने में सबसे बड़ा योगदान सिद्ध होगा।” — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मार्च 2026 से शुरू हुआ यह राष्ट्रव्यापी अभियान अब जन-आंदोलन का रूप ले रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ की जड़ों को नई पहचान मिल रही है।


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