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SECL प्रबंधन की लापरवाही से कुसमुंडा बना ‘जाम का टापू’, सर्वर डाउन होने से सड़कों पर घंटों फंसे रहे लोग!

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कोरबा 8 अप्रैल 2026 : एसईसीएल कुसमुंडा खदान प्रबंधन की भारी अव्यवस्था और लेटलतीफी का खामियाजा एक बार फिर आम जनता को भुगतना पड़ा है। खदान में भारी वाहनों के प्रवेश में हुई देरी के कारण कुसमुंडा की फोरलेन सड़क किसी पार्किंग यार्ड में तब्दील हो गई।

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आलम यह रहा कि इमलीछापर चौक से लेकर आनंद नगर पुल और वैशाली नगर तक ट्रकों की मीलों लंबी कतारें लग गईं, जिससे पूरा इलाका ट्रैफिक जाम की गिरफ्त में आ गया।

शादी-ब्याह के सीजन में राहगीर बेहाल भीषण गर्मी और दोपहर की चिलचिलाती धूप में लोग घंटों सड़कों पर फंसे रहे। वैवाहिक सीजन होने के कारण बड़ी संख्या में लोग हल्दी और अन्य रस्मों में शामिल होने के लिए निकले थे, लेकिन जाम ने उनकी खुशियों में खलल डाल दिया। खासकर पेट्रोल टंकी के पास स्थित संकरी पुलिया और कुचौना मोड़ के पास रुके हुए सड़क निर्माण कार्य ने कोढ़ में खाज का काम किया। स्थानीय प्रशासन और विभाग की सुस्ती के चलते दुकानों को तो हटा दिया गया, लेकिन सड़क का चौड़ीकरण न होने से यहां रोज मौत का सफर तय करना पड़ रहा है।

सर्वर फेलियर या प्रबंधन की सुस्ती? बताया जा रहा है कि एसईसीएल कुसमुंडा माइंस में सर्वर की समस्या और स्टॉक मेजरमेंट टीम की अचानक जांच के कारण कोयला लोड करने आए वाहनों की एंट्री रोक दी गई थी। कोयला खदानों में अब मैनुअल बिलिंग बंद कर पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था (सेंट्रल सर्वर) लागू है। शनिवार को करीब 1 लाख 20 हजार टन कोयले का उठाव किया जाना था, लेकिन सर्वर ठप होने और प्रबंधन की मिस-मैनेजमेंट के चलते हजारों भारी वाहन मुख्य मार्ग पर ही खड़े कर दिए गए।

निर्माण में देरी और संकरी सड़कों का दंश फोरलेन सड़क बनने के बाद भी थाना चौक और बैरियर नंबर 6 के पास वाहनों की एंट्री को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। संकरी पुलिया और अधूरे निर्माण कार्यों के बीच भारी वाहनों की कतारों ने पैदल और दोपहिया वाहन चालकों का जीना मुहाल कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जब खदान के अंदर जगह नहीं थी या सर्वर की समस्या थी, तो वाहनों को मुख्य मार्ग पर रोककर जनता को बंधक क्यों बनाया गया?


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